पुस्तकों से पढाई और टेस्ट सिरीज से खुद को तौलना है मेरी सफलता का राज:निहारिका भट्ट

पुस्तकों से पढाई और टेस्ट सिरीज से खुद को तौलना है मेरी सफलता का राज:निहारिका भट्ट
पुन्डुचेरी कैडर की 2014 की पास आउट आईपीएस निहारिका भट्ट का कहना है कि केवल पुस्तकों से पढाई और टेस्ट सिरीज से खुद को तौलने से ही उन्होंने यूपीएससी प्रथम प्रयास में ही पास कर लिया। लखनऊ के डाक्टर मदनलाल ब्रह्मभट्ट की सुपुत्री अमेरिका से एमटेक हैं । उनकी माता श्रीमती अनामिका ब्रह्मभट्ट जी गृहणी हैं ।
एथेन्टिक रिसोर्स के सवाल पर उन्होंने कहा कि आज इन्टरनैट के जमाने में यह कोई बडी चीज नहीं है ।बहुत से वेबपेज हैं जिनमें अच्छी पुस्तकों की सूची मिल जाती है । मैंने पुस्तक बुला कर पढाई की थी। अगर कोई चाहे तो वे पुस्तकों की सूची भी लोगों से साझा करने को तैयार हैं ।
लोग कोचिंग लेकर भी पास नहीं हो पाते और आप बिना कोचिंग के पास करने का मन बनाया इसके पीछे क्या करण है पर उनका कहना था कि हर आदमी को अपनी खूबी और कमी मालूम होती है ।मुझे विश्वास था कि मैं बिना कोचिंग के निकाल सकती हूँ । मैंने मात्र एक साल पूरे मनोयोग से पढाई की और सफलता हासिल कर ली।वास्तव में जब आप अपने भविष्य को लेकर निश्चिन्त होते हैं तो आप ज्यादा अच्छा प्रदर्शन कर पाते हैं , मैं एमटेक थी , मेरा भविष्य सुरक्षित था। मैंने इस परीक्षा के लिए शत-प्रतिशत प्रयास किया और सफल हुई।
क्या नौकरी करते हुए भी कोई यह परीक्षा पास की जा सकती है पर उनका कहना था कि की जा सकती है सभी प्रतियोगियों की परिस्थिति और क्षमता अलग-अलग होती है । मैंने बिना नौकरी करते हुए फोकस हो कर प्री में बारह तेरह घंटे और मेन्स की तैयारी के लिए सत्रह अट्ठारह घन्टे पढाई को दिए हैं । लेकिन मैंने मात्र सात आठ घंटे की पढाई में भी अपने सहपाठियो को यूपीएससी निकालते पाया है । उन्होंने कहा कि आप्शनल विषय के अंक भी मायने रखते हैं ।मेरा आप्शनल विषय समाज शास्त्र था।
इन्टरव्यू की तैयारी में किन बातों का ध्यान रखना पडता है पर उनका कहना था कि इसमें आपका आत्मविश्वास देखा जाता है ।बोर्ड को भी मालूम होता है कि कोई भी व्यक्ति सर्वज्ञ नहीं हो सकता है ।इसलिए यदि उत्तर न आता हो तो ईमानदारी से बता देना चाहिए। बोर्ड आपसे ईमानदारी की अपेक्षा करता है ।
पिछले छह साल से कार्यरत निहारिका अब शादी के बाद निहारिका भट्ट शर्मा हो गई हैं । वो अपने पद से संतुष्ट हैं उनके अनुसार अब महिला अधिकारियों को विभाग में कोई परेशानी नहीं होती है पिछ्ले चार पांच सालों में महिला अधिकारियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है ।

About The Author

निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

Learn More →

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अपडेट खबर के लिए इनेबल करें OK No thanks