*श्रीराधारानी मंदिर_बरसाना*

*ब्रजदर्शन*
*श्रीराधारानी मंदिर_बरसाना*
भानुगढ़ यानी श्रीराधारानी मंदिर की दो सौ फुट ऊँची चोटी पर भानु दुलारी जग की उजियारी ठाट-बाट से विराजी है। लाडिली जी का धाम रसिकों की धड़कन है। इस विश्व विख्यात मंदिर में भक्तों का ज्वार उमड़ता है। साढ़े तीन सौ सीढियाँ चढ़कर भी श्रदालुओं के चेहरे असीम आनंद से खिले रहते है। राधे राधे की जय जयकार करते हुए भवन की ओर बढ़ते है। कोई कीर्तन करता है तो कोई थिरकता है। श्रीराधे की रसधार में डूबे भक्त अंदर प्रवेश करते है। कृपादायनी आह्लादिनी शक्ति के दर्शन पाकर रोम-रोम पुलक उठता है। नजरें हटती नही, कदम बढ़ते नही। विचित्र मनोस्थिति हो जाती है। आंखों में प्रेमाश्रु उमड़ते है। हृदय बस यही गाता है,
*”एक नजर कृपा की करदो लाडिली श्रीराधे, भक्तों की झोली भरदो लाडिली श्रीराधे”*
बरसाना में प्रवेश करते ही श्रीजी मंदिर का शिखर नजर आता है। बादामी पाषाण से निर्मित प्राचीन मंदिर की अद्भुत छटा है। संगमरमर के विशाल चौक में बलवंतराय सिंधिया की छतरी है, जिसमें करुणामयी श्रीराधारानी साल में तीन बार होली, हरियाली तीज एवं राधाष्टमी पर नीचे आकर अपने प्रिय भक्तों पर कृपा बरसाती है। दाईं ओर सीढ़ियों से ऊपर चढ़कर कलात्मक प्रवेश द्वार से मंदिर प्रांगण में पहुँचते है। अंदर गर्भगृह में लाडिली जी के संग सखी वेश में लाला विराजमान है। साथ में ललिता विशाखा भी है। श्रीराधारानी मंदिर माध्व गौड़ीय सम्प्रदाय से जुड़ा हुआ है। यहाँ सात भोग एवं पाँच आरती की सेवा है।
मंदिर में होली एवं राधाष्टमी का उत्सव प्रमुखता से मनाया जाता है। वसंत पंचमी से मंदिर में समाज गायन प्रारम्भ हो जाता है जो धुलेड़ी तक चलता है। बरसाना की लठामार होली विश्व प्रसिद्ध है। मंदिर के गोस्वामी परिवार की स्त्रियाँ नंदगाँव के हुरियारों के संग लठामार होली खेलती है।
*जय जय श्रीराधे*

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