अपात्र लोग पा रहे हैं सरकारी राशन

*जिनके पास राशन कार्ड नहीं, उन्हें भी मिलेगा राशनÓ का उद्देश्य हुआ फ ेल*
◾प्रदेश सरकार के आदेश को चूना लगा रहे लोग
◾नहीं मिल रहा पात्रों को राशन
◾गली मुहल्लों के स्थानीय नेता सेक रहे अपनी राजनीति
◾अपात्र लोग पा रहे हैं सरकारी राशन
एटा।
प्रदेश सरकार का गरीबों के हित में लिये गणे निर्णय ‘जिनके पास राशन कार्ड नहीं, उन्हें भी मिलेगा राशनÓ को कुछ गली मुहल्लों के स्थानीय नेता धता साबित कर रहे हैं। आगामी चुनावों की तैयारियों के मद्देनजर शासन द्वारा गरीबों के लिये प्रदत राशन को अपने द्वारा देने का बता अपनी राजनैतिक रोटियां सेक रहे हैं। ऐसे ग•भीर मामले को जिलाधिकारी महोदय अपनी ओर से संज्ञान में लेकर आवश्यक कार्यवाही करें तभी प्रदेश सरकार के उद्ेश्य को सफलता प्राप्त होगी। जनपद में ऐसे मामले प्रत्येक नगर एवं कस्बों में देखने को मिल रहा है। जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए बनाए गए कंट्रोल रूम पर आने वाली कॉल के बाद लेखपाल के अलावा तहसील कर्मी सर्वे के बाद उस घर तक राशन पहुंचाने का आदेश जिलाधिकारी महोदय सुखलाल भारती द्वारा प्रदेश के मु•यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्णय पर जारी किया गया है। जिसमें एटा नगर के प्रत्येक बार्डों में राशन वितरण हेतु 2-2 लेखपालों की तैनाती की गयी है। उपजिलाधिकारी अबुल कलाम ने जानकारी दी की कंट्रोल रूम पर जिले व लोकल लेवल पर जरूरतमंद लोगों के फोन आते हैं। जिसके आधार पर उन्हें कच्चा राशन आदि लेखपाल जांच के बाद देते हैं। जोकि राशन क्षेत्र में सरकारी राशन की दुकान से बांटा जायेगा। परन्तु यहां इसके विपरीत हो रहा है बार्डों के स्थानीय नेता जो आगामी चुनाव में सभासद की तैयारी में लगे हुये है वो अपने द्वारा बनायी गयी सूची को लेकर लेखपाल के माध्यम से प्रमाणित करा लेते हैं और कच्चा राशन के पैकेट प्राप्त कर अपने निवास से यह कहकर बांटते हैं कि ये राशन उनके द्वारा बांटा जा रहा है। जब राशन बांटा जाता है तो लेखपाल साहब मौजूद ही नहीं होते हैं और न ही जगह को ध्यान में रखा जाता है। यहां तक की वहां के बार्ड के स•ाासद को भी वितरण की जानकारी नहीं दी जाती। जिससे सूची में शामिल नामों का सत्यापन किया जा सके। होता यह है कि अपात्र लोग राशन को अपने घर ले जाते हैं और कुछ पैकेट तो बांटने वाले नेता जी अपने ही घर में रख लेते हैं और बेचारे पात्र गरीब अपनी पीड़ा को अपने ही मन में दबाये चले जाते हैं। यहां यही साबित हो जाता है कि पेड़ लगाये आम के किसी ने और फल खाये कोई और।

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