
बरेली। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बरेली के निर्देशन और एसआईटी के नोडल पुलिस अधीक्षक अपराध के पर्यवेक्षण में अपराध एवं अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जीएसटी एसआईटी बरेली और थाना कैंट पुलिस ने करोड़ों रुपये की जीएसटी धोखाधड़ी, बोगस आईटीसी क्लेम और वित्तीय हेराफेरी करने वाले संगठित गिरोह का खुलासा किया है।
पुलिस ने मामले में फरार चल रहे आरोपी फरजान हाशमी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी घटना के बाद नेपाल में छिपकर फर्जी नाम से रह रहा था और वहीं से अपने साथियों के संपर्क में रहकर फर्जी इनवॉइस का काम कर रहा था।
पुलिस के अनुसार थाना किला में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 433/2025 में पहले ही सद्दाम हुसैन और मोहम्मद समद उर्फ शाहरुख को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। विवेचना के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर फरजान हाशमी को गिरफ्तार किया गया।
नेपाल से संचालित कर रहा था नेटवर्क
पूछताछ में पुलिस के सामने आया कि जीएसटी अधिकारियों की छापेमारी के बाद फरजान नेपाल भाग गया था। वहां वह ‘संदीप’ नाम से रह रहा था और जंगी (Zangi) ऐप के माध्यम से गिरोह के सदस्यों से संपर्क में था। पुलिस के मुताबिक नेपाल से ही फर्जी जीएसटी इनवॉइस तैयार कराने और काटने का काम जारी रखा गया।
जांच में गिरोह द्वारा विभिन्न बैंक खातों के जरिए 100 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन किए जाने की बात सामने आई है। गिरोह फर्जी फर्मों के नाम पर बिना वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के बिल तैयार करता था और इनके माध्यम से बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाता था।
डीएम कंपाउंड के सामने खोला था ऑफिस
पूछताछ में फरजान ने पुलिस को बताया कि विनीत अरोरा, अनुज अग्रवाल और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर डीएम कंपाउंड के सामने एक ऑफिस खोला गया था। इसी कार्यालय से फर्जी फर्मों के बिल तैयार करने, बिना वास्तविक लेनदेन के धनराशि को अलग-अलग खातों में घुमाने और जीएसटी क्लेम कराने का काम किया जाता था।
पुलिस के मुताबिक गिरोह के मुख्य सरगना के तौर पर सागर अग्रवाल का नाम सामने आया है। वह लाभ प्राप्त करने वाली वास्तविक फर्मों और बोगस आईटीसी तैयार करने वाली फर्जी फर्मों के बीच कड़ी का काम करता था। आरोप है कि सागर अग्रवाल फर्जी फर्म उपलब्ध कराता और उनके जरिए फर्जी बिल तैयार करवाकर बड़े कारोबारियों तक पहुंचाता था।
फर्जी आधार-पैन से बनाई गईं दर्जनों फर्में
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य दिल्ली के आसिफ से फर्जी आधार और पैन कार्ड हासिल कर दर्जनों फर्जी फर्में तैयार कराते थे। इन फर्मों के नाम पर बिना किसी वास्तविक माल की आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस जारी किए जाते थे। इसके बाद बैंक खातों के जरिए रकम को कई स्तरों पर घुमाया जाता था।
पुलिस ने एफएस ट्रेडर्स, सिद्धि विनायक इंटरप्राइजेज, मां इंटरप्राइजेज, नाइट स्टार, आर्ट लाइफ हुडा, आर्ट लाइफ एसोसिएट, अरहम एग्रो फूड्स और केएच इंटरप्राइजेज समेत कई फर्जी फर्मों के बारे में जानकारी जुटाई है।
मास्टरमाइंड समेत 10 से अधिक आरोपी चिन्हित
पूछताछ में पुलिस ने गिरोह के मास्टरमाइंड सागर अग्रवाल, कैश सेटल करने वाले विनीत अरोरा, फर्जी फर्मों के रिटर्न भरने वाले अनुज अग्रवाल, रकम को घुमाने और ठिकाने लगाने वाले शिवम गुप्ता उर्फ लाला समेत कई आरोपियों की भूमिका चिन्हित की है।
इसके अलावा सैय्यद सैफ उर्फ सैय्यद मोहिउद्दीन अहमद, शाजिर, आसिफ, तौसिफ, फिरोज और फम्मी उर्फ फराज को भी पुलिस ने वांछित/फरार आरोपियों की सूची में रखा है। पुलिस इनके संबंध में आगे की जांच और विधिक कार्रवाई कर रही है।
लैपटाप, मोबाइल समेत इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
गिरफ्तार आरोपी फरजान हाशमी के कब्जे से पुलिस ने एक लैपटाप, लैपटाप चार्जर, एक माउस और छह मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच से फर्जी फर्मों, बैंक खातों और इनवॉइस से जुड़े नेटवर्क के बारे में और महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
कार्रवाई मुख्य विवेचक जीएसटी एसआईटी बरेली एवं प्रभारी निरीक्षक थाना कैंट निरीक्षक संजय कुमार धीर के नेतृत्व में की गई। टीम में निरीक्षक अपराध भारत सिंह, उपनिरीक्षक वीर भद्र सिंह, इंतजार हुसैन, प्रतीक तोमर, त्रिवेंद्र कुमार सहित थाना कैंट पुलिस के अन्य कर्मचारी शामिल रहे।