
बरेली। महिलाओं की सेहत सिर्फ एक विषय नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान और आत्मविश्वास से जुड़ा एक अहम पहलू है। इसी कड़ी में ब्रेस्ट कैंसर आज एक गंभीर चुनौती बनकर उभर रहा है, जो हर उम्र और वर्ग की महिलाओं को प्रभावित कर रहा है।
भारत समेत दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा पाए जाने वाले कैंसर में शामिल है। यह तब होता है जब स्तन की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़कर ट्यूमर बना लेती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे बढ़ती उम्र, हार्मोनल बदलाव, मोटापा, शराब का सेवन, कम शारीरिक गतिविधि और पारिवारिक इतिहास जैसे कई कारण जिम्मेदार होते हैं।
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा की सीनियर डायरेक्टर एवं ब्रेस्ट सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. नवनीत कौर के मुताबिक, “अगर ब्रेस्ट कैंसर की समय पर पहचान हो जाए, तो इलाज के परिणाम काफी बेहतर होते हैं। 40 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को नियमित मैमोग्राफी करानी चाहिए, जबकि जोखिम वाली महिलाओं को पहले से ही जांच शुरू कर देनी चाहिए।”
स्तन में गांठ (लंप)
निप्पल से असामान्य डिस्चार्ज
त्वचा में गड्ढा या लालिमा
लगातार दर्द या आकार में बदलाव
विशेषज्ञ बताते हैं कि आज के समय में ब्रेस्ट कैंसर का इलाज काफी एडवांस हो चुका है। सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और टार्गेटेड थेरेपी के जरिए मरीजों को बेहतर इलाज मिल रहा है। साथ ही, पर्सनलाइज्ड मेडिसिन के जरिए इलाज को और प्रभावी बनाया जा रहा है।
लेकिन यह सिर्फ शारीरिक बीमारी नहीं है—इसका असर मानसिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। ऐसे में परिवार का सहयोग, काउंसलिंग और सही जानकारी महिलाओं को इस लड़ाई में मजबूत बनाती है।
ब्रेस्ट कैंसर से डरने की नहीं, बल्कि समझदारी और जागरूकता के साथ लड़ने की जरूरत है। नियमित जांच, स्वस्थ जीवनशैली और समय पर इलाज ही इससे बचाव और जीत का सबसे बड़ा मंत्र है।