अब और नहीं “पत्रकार सुरक्षा कानून” समय की माँग हैराकेश डी यादव

अब और नहीं “पत्रकार सुरक्षा कानून” समय की माँग है
राकेश डी यादव
राष्ट्रीय अध्यक्ष-द जर्नलिस्ट एसोसिएशन

द जर्नलिस्ट एसोसिएशन” यह सवाल बार-बार उठाता रहा है क्या पत्रकारों की जान की कीमत कुछ भी नहीं? क्या उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर, हर बार सच्चाई सामने लाने की सज़ा भुगतनी होगी? पिछले 10 वर्षों में देशभर में सैकड़ों पत्रकारों पर हमले, उत्पीड़न और हत्याएं हुई हैं। कितने मामलों में न्याय मिला, कितने हमलावरों को सज़ा हुई ,कितने परिवार आज भी डर और असुरक्षा में जी रहे हैं? यह स्थिति बेहद शर्मनाक और चिंताजनक। एक मजबूत “पत्रकार सुरक्षा कानून” की जरूरत है जिससे पत्रकारों को विशेष कानूनी संरक्षण मिले,
“द जर्नलिस्ट एसोसिएशन” की ओर से राष्ट्र के सभी पत्रकारो को संबोधित, संगठन की ओर से राष्ट्रव्यापी अपील” पत्रकार की कलम पर वार, लोकतंत्र पर प्रहार, देश में जब भी किसी पत्रकार पर हमला होता है, तो दरअसल यह सिर्फ़ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि सत्य की खोज पर, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर, और पूरे लोकतंत्र की आत्मा पर हमला होता है। भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में जहाँ पत्रकारों को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है,आज वही स्तंभ लगातार निशाने पर है।“द जर्नलिस्ट एसोसिएशन” यह सवाल बार-बार उठाता रहा है क्या पत्रकारों की जान की कीमत कुछ भी नहीं? क्या उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर, हर बार सच्चाई सामने लाने की सज़ा भुगतनी होगी? पिछले 10 वर्षों में देशभर में सैकड़ों पत्रकारों पर हमले, उत्पीड़न और हत्याएं हुई हैं। कितने मामलों में न्याय मिला, कितने हमलावरों को सज़ा हुई ,कितने परिवार आज भी डर और असुरक्षा में जी रहे हैं? यह स्थिति बेहद शर्मनाक और चिंताजनक। एक मजबूत “पत्रकार सुरक्षा कानून” की जरूरत है जिससे पत्रकारों को विशेष कानूनी संरक्षण मिले, जिससे उनके ऊपर हमले गैर-जमानती अपराध हों। हर जिले में “पत्रकार सुरक्षा प्रकोष्ठ” का गठन हो। किसी भी खतरे की स्थिति में तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। न्यायिक प्रक्रिया तेज़ और निष्पक्ष हो। झूठे मुकदमों और राजनीतिक दबाव से पत्रकारों की रक्षा हो। “द जर्नलिस्ट एसोसिएशन” सरकार से, न्यायपालिका से, और समूचे समाज से यह अपील करता हैं कि अब समय आ गया है कि एक स्वतंत्र, निर्भीक और सुरक्षित पत्रकारिता के लिए भारत में “राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून” पारित किया जाए। हम यह मांग केवल एक संगठन के रूप में नहीं, बल्कि हर उस पत्रकार की आवाज़ बनकर कर रहे हैं, जो अपनी जान की परवाह किए बिना सच्चाई की खोज में लगा है। “द जर्नलिस्ट एसोसिएशन” सरकार को ज्ञापन देगा एवं हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में PIL दाखिल करेगा, देश भर मे जन- जागरूकता अभियान चलाएगा, सोशल मीडिया और जनसंवाद के माध्यम से जनमत तैयार करेगा। अगर पत्रकार सुरक्षित नहीं होंगे, तो समाज को सच कौन बताएगा? “द जर्नलिस्ट एसोसिएशन” यह प्रण लेता है कि जब तक पत्रकार सुरक्षा कानून नहीं बनता, यह संघर्ष जारी रहेगा कलम को डराने वालों से भी, और खामोश बैठने वालों से भी।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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