राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ता महाराष्ट्र..

कल हुए चुनावों में क्या हुआ सबके सामने है कि हरियाणा में बीजेपी की सरकार ने शपथ ले ली है, चाहे भीड़ इकट्ठा करने के लिए लोगों को बसों में छोले भटूरे खिलाकर लाना पड़ा। भीड़ जो न इनके चुनाव प्रचार में थी और न ही इनकी सरकार के शपथग्रहण में आने को तैयार थी। हरियाणा के लोगों को छोले भटूरे का लालच देकर भीड़ जुटाने का नायाब तरीका और नायब सिंह सैनी का मुख्यमंत्री पद पर शपथग्रहण।

कल क्या होगा..?

राजनीतिक खेल, पहले किसी को समझ नहीं आता, और आ गया तो वह खेल नहीं होता लेकिन ऐसा हर राजनीतिक दल में नहीं होता, यह केवल ओर केवल बीजेपी ही कर सकती हैं। हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के साथ महाराष्ट्र व झारखंड के चुनाव को रोक लिया गया था। हरियाणा विद्यालय गठन का समय था, महाराष्ट्र में भी सरकार बनाये जाने का पर्याप्त समय था लेकिन झारखंड की विधानसभा में अभी बहुत समय है। लेकिन हां चुनाव साथ हों तो आपत्ति भी नहीं है, अगर इन दोनों राज्यों के चुनाव हरियाणा व कश्मीर के साथ हो जाते तो भी आपत्ति किसी को नहीं थी। लेकिन किसी योजना के तहत इसे रोका गया था, यह सिद्ध होने जा रहा है।

हरियाणा कुल 90 सीटों की विधानसभा है और परिणाम गणना के दिन देर शाम तक पूरे नहीं हुए। महाराष्ट्र हरियाणा विधानसभा से 3 गुना बड़ा है, वहां 288 सीटें हैं और परिणाम 23 नवम्बर को घोषित होंगे और विधानसभा का गठन किसी भी हाल में 26 नवम्बर के रात 12 बजे से पहले होना है। अन्यथा वहां राष्ट्रपति शासन लागू हो जाएगा।

हरियाणा एक छोटा राज्य है, बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ चुनाव जीत कर आई है लेकिन सरकार बनाने में 8 दिन खर्च कर दिए। क्या महाराष्ट्र में ऐसा सम्भव हो जायेगा कि महज दो दिन में वहां सरकार का गठन हो जायेगा? यानी महाराष्ट्र को कहीं राष्ट्रपति शासन की ओर धकेला जा रहा है। बीजेपी हरियाणा भी जानती थी कि वहां चुनाव नहीं जीत सकते लेकिन हरियाणा छोटा राज्य होने के कारण चुनाव आयोग को कुछ व्यवस्था करने में सुविधा थी, क्या महाराष्ट्र में ऐसा कर सकेंगे.? हरियाणा चुनाव के बाद चुनाव आयोग के चेहरे पर छपे कमल के फूल देख चुकी जनता को अब क्या महाराष्ट्र की जनता स्विकार करेगी.?

माहौल केवल हरियाणा, कश्मीर ही नहीं पूरे देश में बीजेपी के खिलाफ है। ईमानदारी से वह चुनाव नहीं जीत सकते, लेकिन देश के चुनाव आयोग का समर्थन बीजेपी के साथ है और सरकार बनाने से वह नहीं चूकते। सरकारी मान्यता मे चुनाव आयोग एक स्वायत्त संगठन है लेकिन समझोते के तहत चुनाव आयोग का एलांयस बीजेपी के साथ ही है।

बीजेपी जानती है कि नवम्बर में होने वाले घुनावी राज्य भी बीजेपी के खिलाफ है लेकिन बीजेपी की जीत हार बीजेपी के अस्तित्व के भविष्य का फैसला है। इसमें हो सकता है कि महाराष्ट्र बीजेपी जीत कर झारखंड को हार जाये। झारखंड की गरीबी में बीजेपी को ज्यादा मतलब नहीं है। लेकिन हां झारखंड, बिहार और बंगाल को काबू करने में केंद्र बिंदु हो सकता है और अगर बीजेपी को सुविधा हुई तो झारखंड भी बीजेपी का ही होगा।

सबसे पहले यह समझना है कि क्या बीजेपी महाराष्ट्र में विपक्ष की सरकार बनने देगी? क्या इसीलिए चुनाव आयोग ने सरकार बनाने और परिणाम के बीच बहुत कम समय रखा है कि बीजेपी महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लागू करवाने का कारण बताने में तकनीकी और नियम का सहारा ले सकें। और इस बात का अंदेशा ज्यादा है कि विपक्ष को बहुमत की तरफ बढ़ने से रोक बीजेपी न विपक्ष को सरकार बनाने दे और ना ही खुद ही बनाए।

एस के शर्मा.. लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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