श्रीमदभागवत कथा का विश्राम दिवस कोई सुदामा जैसा समर्पण करे तो भगवान सेवा में सदैव तत्पर हैं

वाराणसी, 12 अगस्त। श्री कृष्ण उत्सव सेवा समिति एवं हैहय वंशीय क्षत्रिय कसेरा महासभा तथा वाराणसी केराना व्यापार समिति द्वारा आयोजित रामकटोरा स्थित चिन्तामणी बाग में विख्यात श्रद्धेय सुश्री लक्ष्मीमणी शास्त्री ने श्रीमद्भागवत कथा के सातवें एवं अंतिम दिवस पर बताया कि दुनिया में ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं, पहला चन्द्र ग्रहण, दूसरा सूर्य ग्रहण और तीसरा पाणि ग्रहण, जिसमें चन्द्र ग्रहण एवं सूर्य ग्रहण तो आते जाते रहते हैं, लेकिन पाणि ग्रहण वह ग्रहण है, जो मानव जाति के लिए प्रेम बन्धन है, जिसके साथ पाणि ग्रहण हुआ तो उसका हाथ अपने जिन्दगी भर पकड़ कर प्रेमपूर्वक अपना जीवन बिता दें। भगवान ने मथुरा में आकर पापाचारी, अत्याचारी, अनाचारी कंस का वध किया, रुकमणी और राधा रानी का अंतर समझाया। हर मंदिरों में या जहाँ जहाँ भी श्री कृष्ण की मूर्ति होती है, वहां उनके साथ राधा जी की मूर्ति ही क्यों होती है, जबकि माता रूकमणी से विवाह हुआ, माँ रुकमणी लक्ष्मी स्वरूपा हैं। आचार्य जी ने भक्त सुदामा के चरित्र पर कथा बहुत मार्मिक ढंग से सुनाया, कथा इतनी भक्तिमय एवं रसमय थी कि पंडाल में बैठे हुए अपार जनसमूह श्रद्धालु भक्तों के आँखों से आँसू की अविरल धारा बहने लगी। व्यास जी द्वारा बताया गया कि भगवान अपने भक्तों की सदैव परिपूर्णता का ध्यान रखते हैं, बस उनके चरण शरण में अपने को अर्पण करने की आवश्यकता है। आप श्रद्धा से याद करो, थोड़ा अर्पण करो, ढेरों सम्पन्नता प्राप्त करो, मनोवांछित फल पाओ। जरूरत है सिर्फ प्रभु पर अटूट विश्वास भरोसा एवं की।

सात दिनों से प्रारम्भ श्रीमद्भागवत जी का पारायण पूर्ण होने पर आचार्य श्री कलाधर गुरू ने हवन कर पूर्णाहुति सम्पन्न कराया। कथा में अपारजनसमूह का सैलाब श्रद्धालुजनों से पूरा पंडाल भरा था, एक इंच भी पंडाल में कोई जगह रिक्त नहीं थी। भागवत कथा के समापन पर संस्था द्वारा प्रसाद के साथ महाप्रसाद (भण्डारा) का वितरण किया गया।

भव्य आरती इक्कीस श्रद्धालु भक्तों ने किया। सभी का स्वागत भाषण कलाधर गुरु ने किया। इस सफलतापूर्वक सुंदर आयोजन के लिए संस्था के अध्यक्ष श्री अशोक कसेरा ने सभी को बधाई देकर स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्रम् के साथ सम्मानित किया एवं सभी का आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन संस्था के महामंत्री विनोद कसेरा एवं कोषाध्यक्ष भईया लाल ने किया। महाप्रसाद की वितरण व्यवस्था विनोद तलवार, अनिल कसेरा, अरूण कसेरा पप्पू कसेरा, बुद्धलाल कसेरा, विजय बिजलीवाले, रवि, मन्टू, आकाश, पवन, मनीष, शिवम कसेरा ने सुचारू रूप से सम्पन्न कराया।

संस्था सभी श्रद्धालु भक्तों एवं चन्दादाताओं का आभार प्रकट करती है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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