
डाक विभाग के बड़े अफसरों की अनदेखी से दागी कर्मचारियों का हस्तक्षेप बड़ा..!
आंखे मूंदे बैठे हैं अधीक्षक कर्मचारियों से मिल कर दागी कर सकते हैं कोई गोलमाल
एटा। केंद्रीय सरकार का माना जाने बाला एटा का भारतीय डाक विभाग की यूं तो आए दिन नित नए घोटालों गबन जैसी वित्तीय अनियमितताओं में सुर्खियों में रहता चाहे विभागीय एजेंट्स की करिस्तानियां हो या फिर डाक विभाग के जिम्मेदारों की मिली भगत से घोटाले हर वर्ष कोई न कोई मामला सामने आता रहा यद्यपि एटा में मोर्डनालिजेशन हुआ सिस्टम को अपग्रेड किया गया हैं परंतु जब कर्मचारियों की नियत में खोट हो तो कुछ भी संभव हो जाता हैं। इन दिनों एटा मुख्यालय सहित अनेकों डाक शाखाओं में एक टर्मिनेट उप डाक सहायक नीतेश कुमार सक्सेना नाम का कर्मी मुख्यालय सहित डाक शाखाओं में बैठा देखा जाता है जिसके सेवाकाल के घपले/गबन आदि के मामले चर्चित रहे हैं उक्त कर्मी ने२०१२एवं २०१३ में जलेसर उप डाक घर में लाखों का गबन किया था जिसको विभागीय कार्यवाही कर बर्खास्त कर दिया गया। ऐसे दागी कर्मी का विभागीय कामकाज में हस्तक्षेप देखा गया जिस पर पड़ताल करते हुए पिछले दिनों इस प्रतिनिधि ने सचित्र/वीडियो ग्राफीक समाचार प्रकाशित किया।इस मामले में जब डाक अधीक्षक से बात करनी चाही तो उन्होंने कॉल नही उठाई। इस मामले में अधीक्षक कार्यालय के कर्मी और दो हाथ आगे जाकर अपनी उद्दंडता का परिचय दे रहे थे। ऐसे में दागी कर्मचारियों हस्तक्षेप डाक विभाग पर भरोसा करने वाले स्थानीय ग्राहकों को निराश कर रहा हैं। स्मरण रहे केंद्र सरकार की अनेक लाभदाई योजनाओं को क्रियान्वित किया जाता हैं। जिससे लघु मध्यम आम आदमी अपना छोटी बचतों के रूप में अपने धन का निवेश करते हैं। लोगो की गाड़ी कमाई केंद्र सरकार के इस डाक विभाग की योजनाओं में लगाई जाती है।
डिविजनल अधीक्षक एवं जोनल अफसरों ने दागियों के हस्तक्षेप पर यदि अंकुश नही लगाया तो यह विभागीय कर्मियों से मिल कर किसी बड़ी अनियमत्ता को अंजाम दे सकते हैं।
अब सवाल उठता हैं डाक घर की गतिविधियों में दागियों के हस्तक्षेप पर विभागीय डाक अधीक्षक की मेहरबानी क्यों हैं ? प्रेस का बार बार कॉल न उठाना कोई कॉल बैक न करना यह दर्शाता हैं कि उन्हें गोपनीय जन सूचनाओं का साझा करने में विश्वास नही हैं?