
सुनवाई
कासगंज में कोर्ट से सुपुर्दगी में मिले महादेव की 22 वर्षों से रखवाली
पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित श्री वनखंडेश्वर महादेव मूर्ति की पिछले दो दशकों से निरंतर रखवाली की जा रही है, पुनर्स्थापना के लिए एक वाद दायर कर दिया
अलीगढ़ कोर्ट में हुई थी सुनवाई
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मूर्ति को मुक्त करा सुपुर्दगी में देने की सहमति व्यक्त की। 5 फरवरी 2001 को चार भक्त जिनमें मुरारी, थान सिंह, शिवपुरी व श्यामपुरी ने मिलकर अलीगढ़ कोर्ट में पैरवी की। पैरवी कर्ताओं ने 8 लाख रुपये कीमत की अपनी जमीन के अभिलेख प्रस्तुत कर महादेव को अपनी सुपुदर्गी पर लेकर गांव आए। जहां से मूर्ति चोरी हुई थी, उसी मंदिर में उसकी पुनर्स्थापना कर दी।
● ए पी चौहान
कासगंज। सोरों जी पंचकोसी परिक्रमा मार्ग पर स्थित श्री वनखंडेश्वर महादेव मूर्ति की पिछले दो दशकों से निरंतर रखवाली की जा रही है। 22 वर्ष पूर्व महादेव की मूर्ति को सुपुर्दगी में लेने के लिए चारों ग्रामीणों ने आठ लाख रुपये कीमत की सम्पत्ति के अभिलेख कोर्ट में जमानत बतौर जमा कराए। तभी से लगातार मंदिर में स्थापित महादेव की रखवाली ग्रामीण और उनके परिवार के लोग कर रहे हैं।
दरअसल 49 वर्ष पूर्व 26 फरवरी 1973 की रात सोरों क्षेत्र के फरीदपुर गांव से अलीगढ़ के कुछ चोर श्री वनखंडेश्वर महादेव मूर्ति को चुरा कर ले गए थे। 29 वर्ष पूर्व 22 मई 1993 को यह मूर्ति अलीगढ़ के थाना पाली मुकीमपुर पुलिस ने बरामद कर ली। तत्पश्चात पुलिस ने मूर्ति को थाना परिसर में ही स्थापित कर दिया। कासगंज के लोगों को जब अलीगढ़ की पाली मुकीमपुर पुलिस द्वारा मूर्ति बरामद होने की जानकारी हुई। इस पर उन्होंने वर्ष 1999 में अलीगढ़ के कोर्ट में मूर्ति को मुक्त कराने व उसकी पुनर्स्थापना के लिए एक वाद दायर कर दिया।
मुकदमा करने वालों के साथ कोर्ट में हमने अपने महादेव को भागीरथ गुफा के सामने स्थित उसी मंदिर में स्थापित किया जहां से महादेव को चोर चोरी कर ले गए थे। कोर्ट से भोलेनाथ को लाकर सुरक्षित करने की जिम्मेदारी को संभाल रहे हैं। मूर्ति की रखवाली की जाती है जिससे मंदिर में इस तरह की घटना फिर नहीं हो सके। सुभाष शर्मा, पैरोकार मुकदमा