
HIV एड्स…भीड़ में अगर कोई ये शब्द जोर से बोल दे, तो सारे लोग अपना काम छोड़कर उसी को देखने लगते हैं. ऐसा इसलिए है, क्योंकि आज भी हमारे समाज में एड्स पर शर्मिंदगी वाली बीमारी का ठप्पा लगा है. लोग हंसते हैं। मौका मिलता है, तो मरीज से उल्टे-सीधे सवाल करते हैं. यही कारण है कि सरकार को HIV एक्ट बनाना पड़ा.
आज 1 दिसंबर यानी विश्व एड्स दिवस है। यानी जागरूकता का दिवस. इस बार की थीम है EQUALIZE, यानी बराबरी. पिछली बार End inequalities. End AIDS थीम था. मकसद हर बार एक ही रहा कि लोग जागरूक हों और इस लाइलाज बीमारी से मजबूती से लड़ें. यूपी में मरीजों का क्या हाल है? उन्हें कैसे इलाज मिल रहा? कौन सबसे ज्यादा संक्रमित हो रहा? यह सब जानने के लिए निजी न्यूज़ रिपोर्टर नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के दफ्तर पहुंचे.
उत्तर प्रदेश में इस वक्त 1 लाख 15 हजार HIV पॉजिटिव मरीजों का इलाज प्रदेश के 75 अलग-अलग जिलों में हो रहा है. नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के दिए आंकड़े के अनुसार 2011 से 2021 के बीच पूरे देश में 17 लाख 8 हजार 777 लोग असुरक्षित यौन संबंधों के चलते संक्रमित हुए हैं. यूपी इस लिस्ट में चौथे नंबर पर है. सबसे ज्यादा मामले आंध्र प्रदेश में आए हैं.
असुरक्षित यौन संबंधों के अतिरिक्त जो इस वक्त सबसे ज्यादा घातक साबित हो रहा वह नशेड़ियों का सिरिंज के जरिए ड्रग्स लेना है. एक ही सिरिंज से एक साथ कई लोग नशा कर रहे, इससे उनके संक्रमित होने के चांस बढ़ गए हैं. एड्स कंट्रोल सोसाइटी की असिस्टेंट डायरेक्टर प्रभजोत कौर ने बताया, 2010 में 4.5 गुना मरीजों के संक्रमित होने का कारण ये सिरिंज ही थी. तमाम जागरूकता के बाद 2017 में थोड़ी सी कमी आई, लेकिन यह कमी भी केवल 1% ही घटी.