मातृत्व दिवस का क्या यही अर्थ रह गया है

*मातृत्व दिवस का क्या यही अर्थ रह गया है*

*हो सकता है कि मेरा ये लेख ज्यादातर लोगों को पंसद ना आये, कहीं ना कहीं कुछ लोगों में दोगलापन हावी रहता है, मातृत्व दिवस हमें माँ का सम्मान करना सिखाता है,चाहे वो माँ किसी की भी हो, हमें सभी माताओं का सम्मान करना चाहिए, ज्यादातर देखा जाता है कि कुछ लोगों की जुबान व ज़हन में माँ बहिन की गालियाँ इतनी हावी रहती है कि वो जरा सा भी गुस्से या आवेश मे आने पर या किसी को डराने धमकाने के लिए तुरंत सामने वाले को तेरी माँ की तेरी बहिन की@ आदि मां बहिन की गालियाँ निकालना शुरू कर देते हैं, ऐसा करके वो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी ना किसी की माँ बहन का अपमान ही कर रहे होते हैं, ऐसे लोगों की जुबान व ज़हन में एक तरफ तो माँ बहिन की गालियाँ रहती है और दूसरी तरफ मातृत्व दिवस पर बधाईयाँ*
*मातृत्व दिवस हमें कभी भी ये नहीं सिखाता कि हम अपनी माँ का तो सम्मान करें और दूसरे की मां बहिन को गालियाँ देते रहें तो ये उन लोगों का दोगलापन नहीं तो और क्या है*
*मातृत्व दिवस हमें माँ का सम्मान करना सिखाता है, और वो माँ शब्द किसी एक के लिए ना होकर सभी के लिए है, चाहे वो किसी की भी मां हो, हमें सभी का सम्मान करना चाहिए*
*जिस दिन अपनी जुबान व ज़हन से माँ बहिन की गालियों का पूर्णतया त्याग कर देंगे,उस वक्त हम सही अर्थों में मातृत्व दिवस मनाने के हकदार होंगे*
*मेरे लेख से किसी की भावनाएं आहत हुई हो तो माफ़ी चाहता हूँ*

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