
बरेली। थिएटर अड्डा’ के अंतर्गत रंगालय एकेडमी ऑफ आर्ट एंड कल्चर सोसायटी द्वारा आयोजित 15 दिवसीय थिएटर फेस्टिवल के चौथे दिन दर्शकों को ठहाकों और गंभीर सीख का अनूठा संगम देखने को मिला। लोक खुशाली सभागार में आयोजित इस संध्या में ‘एकलव्य थिएटर’ इटावा के कलाकारों ने हास्य नाटक ‘द ग्रेट राजा मास्टर ड्रामा कंपनी’ का सफल मंचन किया।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. नीरज अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद शुरू हुआ अभिनय और संवादों का ऐसा सिलसिला, जिसने पूरे सभागार को तालियों की गड़गड़ाहट से भर दिया।
जब ऐन वक्त पर भागे कलाकार, राहगीरों से बना ड्रामा
दिनेश भारती द्वारा लिखित एवं डॉ. इसरार अली के कुशल निर्देशन में तैयार यह नाटक एक दर्जी ‘राजा मास्टर’ के इर्द-गिर्द घूमता है। जब राजा मास्टर की टेलरिंग की दुकान मंदी की मार झेलने लगती है, तो वह रातों-रात शोहरत कमाने की चाहत में थिएटर का रुख करता है और अपनी एक ड्रामा कंपनी खोल लेता है।
कहानी में मोड़ तब आता है जब नाटक के मंचन के ठीक पहले मुख्य कलाकार मैदान छोड़कर भाग खड़े होते हैं। हड़बड़ाहट में राजा मास्टर सड़क चलते आम राहगीरों को पकड़कर मंच पर अभिनय करने के लिए उतार देता है। नौसिखिए कलाकारों द्वारा मंच पर संवादों का घालमेल, भूल-चूक और अफरातफरी दर्शकों को लोटपोट कर देती है।
’जिसका काम उसी को साजे’
तमाम उठापटक और हास्य-हंगामे के बाद अंत में राजा मास्टर को यह अहसास होता है कि उसका दर्जी का काम ही सबसे बेहतर था। नाटक ने चुटीले अंदाज में समाज को यह स्पष्ट संदेश दिया कि इंसान को वही काम करना चाहिए जिसमें उसकी महारत हो; बिना सोचे-समझे दूसरों की नकल या अनदेखे क्षेत्रों में हाथ आजमाने से केवल फजीहत होती है।
मंच पर डॉ. इसरार अली, आदित्य कुमार, हर्षित, अमन, अपराजिता, रिया और राजधीर ने अपने सधे हुए अभिनय से किरदारों में जान फूंक दी।
समारोह के सफल संचालन और व्यवस्था में शालिनी गुप्ता, शौर्य सक्सेना, अमीषा सक्सेना, सौमिल अग्रवाल और अजय सुमन का विशेष सहयोग रहा।
कल का आकर्षण: थिएटर फेस्ट के पांचवें दिन आजमगढ़ की प्रतिष्ठित नाट्य संस्था द्वारा मुंशी प्रेमचंद की कालजयी रचना पर आधारित नाटक ‘बड़े भाई साहब’ का मंचन किया जाएगा।