फैटी लिवर को हल्के में लेने की भूल? एक छोटी सी लापरवाही बना सकती है सिरोसिस का मरीज


बरेली। क्या आप भी पेट में लगातार भारीपन, थकान या बढ़ते वजन को आम समझकर नजरअंदाज कर रहे हैं? संभल जाइए! यह ‘फैटी लिवर’ का इशारा हो सकता है, जो बिना किसी बड़ी आहट के आपके लिवर को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है।

समस्या: साइलेंट किलर का जाल

शुरुआती दौर में फैटी लिवर के कोई खास लक्षण नहीं दिखते, इसलिए इसे ‘साइलेंट डिसीज’ कहा जाता है। लेकिन अगर समय रहते खान-पान और लाइफस्टाइल नहीं सुधारी, तो लिवर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ने लगती है। धीरे-धीरे यह सूजन लिवर फाइब्रोसिस और आगे चलकर जानलेवा लिवर सिरोसिस में तब्दील हो जाती है, जहां लिवर के स्वस्थ टिश्यू पूरी तरह खराब होने लगते हैं।

​खतरे के दायरे में कौन?

​मोटापा और पेट की चर्बी: वजन ज्यादा होना इसका सबसे बड़ा कारण है।
​डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस: टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों को इसका जोखिम दोगुना होता है।
​शराब और खराब डाइट: अत्यधिक शराब, तला-भुना और अनियंत्रित खान-पान लिवर पर सीधा हमला बोलते हैं।
​पेट के ऊपरी दाएं हिस्से में लगातार दर्द या बेचैनी।
​बिना वजह बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी।
​भूख न लगना और तेजी से वजन गिरना।
​आंखों या त्वचा का पीला पड़ना (पीलिया) और पेट में पानी भरना (सूजन)।
​खून की उल्टी या काला मल आना—यह अंदरूनी ब्लीडिंग का संकेत है, जिसे तुरंत इमरजेंसी मेडिकल केयर की जरूरत होती है।

फैटी लिवर का पता अगर पहली स्टेज पर चल जाए, तो इसे पूरी तरह रिवर्स किया जा सकता है। अपनी सोनोग्राफी या लिवर फंक्शन टेस्ट को नजरअंदाज न करें, तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और आज ही अपनी डाइट में सुधार लाएं।

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पं.सत्यम शर्मा

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