
बरेली। अगर आपने हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय अपनी पुरानी बीमारी यानी प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज छिपाई है, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
आजकल बढ़ते इलाज और अस्पताल के खर्चों के बीच हेल्थ इंश्योरेंस हर परिवार की जरूरत बन चुका है। लेकिन कई लोग प्रीमियम कम कराने या प्रक्रिया आसान बनाने के लिए अपनी पुरानी बीमारी जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की जानकारी बीमा कंपनी से छिपा लेते हैं।
ऐसा करना भविष्य में भारी पड़ सकता है। यदि इलाज के दौरान बीमा कंपनी को यह पता चलता है कि बीमारी पहले से थी और उसकी जानकारी आवेदन के समय नहीं दी गई थी, तो कंपनी आपका इंश्योरेंस क्लेम रिजेक्ट कर सकती है। इतना ही नहीं, पॉलिसी भी रद्द हो सकती है और जमा किया गया प्रीमियम वापस मिलने की संभावना भी नहीं रहती।
बीमा का आधार पूर्ण सत्यता और पारदर्शिता है। इसलिए पॉलिसी खरीदते समय अपनी हर बीमारी की सही जानकारी देना बेहद जरूरी है। भले ही इसके कारण प्रीमियम थोड़ा अधिक हो या वेटिंग पीरियड लागू हो, लेकिन भविष्य में क्लेम मिलने की संभावना मजबूत रहती है और किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।