
बरेली, नई दिल्ली। देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण को लेकर सरकार एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। लोकसभा में आज गृह मंत्री अमित शाह ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026’ पेश करेंगे। इस विधेयक का उद्देश्य पूरे देश में जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल बनाना और फर्जी दस्तावेजों पर प्रभावी रोक लगाना है।
नए कानून के लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र नागरिकों का सबसे महत्वपूर्ण और मुख्य दस्तावेज बन जाएगा, जिसका इस्तेमाल विभिन्न सरकारी और निजी सेवाओं में किया जाएगा।
इतना ही नहीं, सरकार देर से पंजीकरण कराने वालों पर भी सख्ती करने जा रही है। यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक से दो वर्ष की देरी से कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यकारी मजिस्ट्रेट की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
सरकार का मानना है कि इससे समय पर पंजीकरण को बढ़ावा मिलेगा, रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी होंगे और फर्जी पहचान पत्रों के इस्तेमाल पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा। अब इस विधेयक पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसके लागू होने के बाद आम नागरिकों से जुड़े कई नियम बदल जाएंगे।