बाबा साहब के पोस्टर से पटा हुआ स पा  रैली स्थान

एटा,*सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एटा में की रैली *

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एटा के सैनिक पड़ाव में एक जनसभा की.

इस सभा का नाम संविधान बचाओ रखा गया.

बाबा साहब के पोस्टर से पटा हुआ था रैली स्थान.

अखिलेश यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि अगर बीजेपी सत्ता में आई तो संविधान खत्म कर दिया जायेगा.

पहली बार देखा गया है कि सपा की रैली में बाबा साहब के पोस्टर लगे हुए थे.

पूर्व की कई रैलियों को देखते है तो सपा ने कभी भी बाबा साहब को इस तरह से मंच नहीं दिया था.

फिलहाल अखिलेश यादव को आभास हो रहा है कि केंद्र सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर बीजेपी को दलित वोट न कर दे.

सपा प्रत्याशी देवेश शाक्य कोशिश मे लगे हुए है कि सिर्फ एटा में तो संविधान बच ही जाये.

*सपा को याद दिला दिया जाये, तो बेहतर होगा*

सपा से मुलायम सिंह यादव सहित बेटा चार बार मुख्यमंत्री बन चुके है. ज़ब ज़ब सपा की सरकार राज्य में रही है तब-तब संविधान को सपा द्वारा कुचला गया था। सपा शासन की सभी भर्तियों को निकाल कर देखा जाये तो सिर्फ एक जाति को संविधान दे दिया गया था। जिस तरह से आज अखिलेश यादव PDA का राग अलाप रहे है. अखिलेश यादव को यह समझना चाहिए था कि उनकी सरकार के दौरान भी संविधान खत्म किया गया था. OBC, SC,ST की नौकरियो को अखिलेश यादव ने सबसे पहले खत्म किया था. सिर्फ एक मात्र प्रेम के कारण।

*बाबा साहब की तस्वीर लगाने का अधिकार नहीं सपा को!*

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को याद दिला दिया जाये कि रैलियों में बाबा साहब की तस्वीर लगाने से यह साबित नहीं होता है कि आप दलित हितैसी है।सपा कि पूर्व सरकार में दलित की जमीन को खरीदने के लिए न्यायालय की परमिशन की जरुरत होती थी. मुलायम सिंह यादव ने दलित की जमीन को खरीदने की इस परमिशन को छः माह के लिए खत्म कर दिया गया था और इसी के साथ दलित को भूमि विहीन बनाने का सपा ने कार्यक्रम बना दिया था।दलित विरोधी होने के बाद बाबा साहब का पोस्टर लगा लेने से यह साबित करने में लगे है कि बाबा साहब के अनुयाियों के साथ है.सपा पर दलित विरोधी का टैग 2019 लोकसभा चुनाव में ही लग चूका था। क्योंकि दलितों ने लोकसभा 2019 में ही वोट नहीं किया था।

*जिस मायावती को खत्म करने की साजिश की हो!*

बसपा प्रमुख मायावती के गेस्ट हॉउस कांड को कौन दलित और देश भूल सकता है। बाबा साहब के सपनों को जिस महिला ने जमीन पर उतारा हो. उस महिला को सपा ने ख़त्म करने का प्रयोग किया था। फिर सपा प्रमुख अखिलेश यादव कैसे बोल सकते है कि वो दलित, बाबा साहब के हितैसी है।

यह सिर्फ पोस्टरवाजी है.!!!!

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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