इससे ज्यादा बुरा नहीं हो सकता लोकतंत्र के लिए

आज की बात

एक हत्या में गिरफ्तार हो या किसी घपले में दोनों ही में अंतर कितना है ये अपराध की स्थिति देखकर ही कहा जा सकता है। गर जब दोनों ही हालत में जमानत साशर्त दे दी जाती है। मगर वे कितना उन शर्तों को पूरा करते हैं।
एक उदाहरण अभी हाल का ही देख लो शराब घपला में आरोपी संजय सिंह की जमानत को ही ले लें तो पता चलता है कि वो शर्त छोड़ो ऊपर से षणयंत्र में शामिल हो मामले की जाँच प्रभावित कर शर्तों की मजाक बनाता दिख रहा है।
और एक उदाहरण तो इतना बढ़िया और अपराध पूर्ण है लालू यादव ने तो हाई कोर्ट को ही झपकी मे लेकर दोष सिद्ध होने के बाद मिली सजा को ही छिपकर जेल से एक अन्य मामले में हिरासत को आधार बताकर बीमारी के बल काट रहे सजा को जम्प कर बाहर आ गए। झारखंड का हाई कोर्ट अपनी गलती जानकर भी अंजान है। सी बी आई ने कई बार अनुरोध भी किया है मगर कोई फर्क नहीं पड़ता।
दरअसल सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने टिप्पणी की है कि लालू यादव को फिर से जेल में डालना मुश्किल होगा। चारा घोटाले में लालू यादव को मिली जमानत पर सीबीआई की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह बात कही। CBI का पक्ष था कि हाई कोर्ट के त्रुटिपूर्ण अनुमान के आधार पर लालू को जमानत मिली है। इसके मुताबिक चारा घोटाले में लालू की सजा एक साथ चलनी है। वहीं, सीबीआई के अनुसार, लालू की सजाएं एक के बाद एक चलनी थीं, जिसमें उन्हें 14 साल जेल काटनी थी।

इस पूरी सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव के वकील और पुराने कांग्रेसी नेता रहे कपिल सिब्बल की टिप्पणी महत्वपूर्ण थी। उन्होंने कहा, ‘CBI ने जमानत के 14 महीने बाद अपील दाखिल की है और अब उसे सुनवाई की बेचैनी है। इसका बस एक ही मकसद है कि लालू यादव को फिर से जेल में डाल दिया जाए ताकि वह 2024 के लोकसभा चुनाव (2024 Lok Sabha elections) के दौरान बाहर ना रहें।’
कैसी कैसी दलीलें कैसे कैसे मालिक आधार दिये जा रहे हैं न्याय व्यवस्था कितनी अंधेरे में रखी जा रही है इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
कानून और न्याय को कैसे सापेक्ष मैं सकते हैं इसका ऐसे मामलों को जानकर पुछ्ना भी व्यर्थ है।
हमारे देश के कानून में साफ लिखा होते हुए के बाद भी वह व्यक्ति आम बन नहीं वी आई पी बना हुआ है जो दोष सिद्ध के बाद घोषित है मगर वह आज के विपक्ष के मुखिया है।

लालू प्रसाद यादव भारत के एक राज्य बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और एक प्रमुख राजनीतिज्ञ रहे हैं। उन्हें भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी से संबंधित कई मामलों में दोषी ठहराया गया और कारावास की सजा सुनाई गई है।
अपनी दोषसिद्धि और सज़ाओं के खिलाफ अदालतों में अपील और चुनौती दिए जाने के कारण यादव जेल के अंदर-बाहर होते रहे हैं। कुछ मामलों में, उन्हें चिकित्सा उपचार या अन्य कारणों से जमानत या पैरोल दी गई है। अन्य मामलों में, उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया है, और उन्हें जेल में अपनी सज़ा काटनी होगी।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कानूनी प्रक्रिया जटिल और लंबी हो सकती है, और जमानत या पैरोल देना कई कारकों पर आधारित हो सकता है, जिसमें अपराध की गंभीरता, व्यक्ति का स्वास्थ्य और व्यक्ति के भागने या भागने की संभावना शामिल है। सबूतों के साथ छेड़छाड़.ज्
यह भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यादव जैसी राजनीतिक हस्तियां विवादास्पद और विभाजनकारी हो सकती हैं, कुछ व्यक्ति या समूह उनका समर्थन करते हैं और अन्य उनका विरोध करते हैं। इससे सार्वजनिक बहस हो सकती है और उनके कानूनी मामलों और अदालतों द्वारा लिए गए निर्णयों की जांच हो सकती है।
वहीं दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविंद केजरीवाल और झारखंड के सोरण जेल में अपने आपको लालू सिद्ध करने में है कि कब जेल से अदालत को धोका दे आजाद हों।
हमें इन बिंदुओं पर राष्ट्र स्तर पर चर्चा बहस करना चाहिए।

शंकर देव

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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