
“किताबों की दरकार, दावों की किरकिरी
बेसिक शिक्षा के स्कूलों में अब तक आधी भी किताबों की आपूर्ति प्राप्त नहीं हो पाई पुरानी से चला रहे काम”
एटा: शैक्षिक सुधारों में जुटा बेसिक शिक्षा विभाग बच्चों को निश्शुल्क पुस्तक उपलब्ध कराने में पिछड़ गया है। प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में अध्ययनरत बच्चे नये सत्र में नई किताबों का इंतजार कर रहे हैं। वहीं जिले में अभी तक डिमांड के सापेक्ष 11 फीसद पुस्तकों की आपूर्ति ही मिली है। बच्चों को बस्ता भरने में अभी किताबों के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है।
नया शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू हो चुका है। नए सत्र में लगातार नामांकन के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन जो बच्चे भीषण गर्मी में स्कूल पहुंच रहे हैं, उनके बस्ते किताबों के लिए अभी भी खाली है। बच्चों को ड्रेस देने के लिए डीबीटी योजना पर जितना जोर दिया जा रहा है। दूसरी ओर किताबों के मामले में देरी से शुरू हुई प्रक्रिया शासन के दावों की किरकिरी कर रही है। सत्र 2022-23 के लिए बच्चों को पुस्तकों की व्यवस्था के लिए क्रय प्रक्रिया जून में शासन स्तर से देरी से पूरी हो सकी। यही वजह है कि अब तक आधी भी किताबों की आपूर्ति प्राप्त नहीं हो पाई है।
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा शासन से एक लाख 83 हजार 248 कक्षा एक से आठ तक के छात्रों के लिए किताबों की डिमांड की गई थी। पाठ्यक्रम के अनुरूप इस एवज में 10 लाख 36 हजार 506 पुस्तकें जिले के बच्चों को चाहिए। अब जब पुनः स्कूल खुले भी एक महीना बीत चुका है, लेकिन विभाग को सिर्फ एक लाख 14 हजार 127 किताबें आधा दर्जन विषयों की प्राप्त हुई है। किताबों की आपूर्ति की धीमी गति जिम्मेदारों को भी परेशान कर रही है। अभी तक किताबों की सिर्फ 11 फीसद आपूर्ति की स्थिति में पाठ्यक्रम के अनुरूप शिक्षण स्कूलों में कितना प्रभावी होगा। जिला समन्वयक व पाठ्यपुस्तक प्रभारी डा. आर शर्मा का कहना है कि लगातार किताबें प्राप्त हो रही हैं। जुलाई के अंत तक और भी किताबें मिलने पर स्कूल स्तर पर भेजने की प्रक्रिया शुरू करा दी जाएगी।
पुरानी किताबों का है सहारा
-नए सत्र में नई किताबों की अभी पर्याप्त आपूर्ति न होने की स्थिति में बच्चों को पुरानी किताबों का ही सहारा है। मुश्किल तो नया प्रवेश लेने वाले बच्चों को है, जिनके पास कोई भी किताब नहीं है। फिर भी शिक्षक उपलब्ध पुरानी पुस्तकों से कक्षा कक्ष संचालित कर रहे हैं।
स्कूलों में पाठ्यपुस्तक की स्थिति पर एक नजर
— प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में नामांकित छात्र-183248
- निश्शुल्क पाठ्य पुस्तकों की डिमांड-10 लाख 36 हजार 506
- हिंदी माध्यम पुस्तकों की डिमांड-979781
- अंग्रेजी माध्यम पुस्तकों की डिमांड-53156
- उर्दू माध्यम पुस्तकों की डिमांड-3569
- अभी तक जिले को पुस्तकों की प्राप्ति- एक लाख 14 हजार 127