भाजपा की रिपोर्ट में हुआ खुलासा,कैसे फेल हुई अखिलेश की रणनीति,बसपा के जाल में फंस गई सपा

भाजपा की रिपोर्ट में हुआ खुलासा,कैसे फेल हुई अखिलेश की रणनीति,बसपा के जाल में फंस गई सपा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश 2022 विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की दूसरी बार जीत में बहुजन समाज पार्टी के वोट बैंक का खासा योगदान रहा।बहुजन समाज पार्टी की मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती अपने वोट बैंक को सहेजने में फेल रहीं और ये वोटर भारतीय जनता पार्टी के पाले में चले गये।यही उलटफेर समाजवादी पार्टी के मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के रणनीति पर भारी पड़ गया।जाटव के साथ जाट वोट भी भारतीय जनता पार्टी के खाते में चला गया।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 273 सीटों पर जीत हासिल की।भाजपा के इस जीत के पीछे क्या फैक्टर था इसकी रिपोर्ट यूपी भाजपा ने तैयार कर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बसपा के उम्मीदवार उतारने के पैटर्न से भाजपा को बहुत मदद मिली।कई ऐसी सीटें रही, जहां भाजपा की जीत का कारण बसपा के प्रत्याशी उतारने का पैटर्न रहा।

बसपा के उम्मीदवार पड़े सपा पर भारी

रिपोर्ट के अनुसार 122 सीटों पर बसपा ने ऐसे उम्मीदवार खड़े किए जो सपा के लिए घातक सिद्ध हुए।इसी तरह से समझ सकते हैं,जैसे सपा के यादव उम्मीदवार के सामने बसपा ने यादव को ही प्रत्याशी बनाया, इसी तरह मुस्लिम के सामने मुस्लिम को प्रत्याशी बनाया।कई अन्य जातियों के प्रत्याशियों के सामने भी बसपा ने यही रणनीति बनायी।

सपा ने जिन 91 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार उतारे,वहां से बसपा ने भी मुस्लिमों को उम्मीदवार बना दिया।इसी तरह 15 सीटों पर सपा के यादव उम्मीदवारों के सामने यादव प्रत्याशी ही खड़े कर दिए। इन 122 सीटों में से भाजपा ने 68 सीटों पर जीत हासिल की।

सपा-रालोद गठबंधन से भाजपा को नहीं हुआ नुकसान

भाजपा को सपा-रालोद गठबंधन भी नुकसान नहीं पहुंचा पाया।चुनाव से पहले ये माना जा रहा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सपा-रालोद गठबंधन अलग करिश्मा दिखायेगा, लेकिन ये गठबंधन कोई करिश्मा नहीं दिखा पाया।किसान आंदोलन का फायदा भी इस गठबंधन को नहीं मिला।रिपोर्ट में बताया गया है कि किसान आंदोलन के असर वाले जिन 30 सीटों पर रालोद चुनाव लड़ी थी, वहां 8 सीटें ही मिल पायी।

पश्चिमी यूपी में पहले चरण की 58 सीटों में से 46 सीटें भाजपा को मिली हैं। यहां सपा-रालोद गठबंधन को मनमाफिक फायदा नहीं मिला, हालांकि इन सीटों पर जाट वोट ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में बंट गया।शहरी जाट वोट भाजपा को मिला तो ग्रामीण वोट रालोद को मिला। भाजपा ने शहरी क्षेत्र में 17 जाट उम्मीदवार उतारे थे। इनमें से 10 को जीत हासिल हुई थी,जबकि सपा ने 7 प्रत्याशी उतारे और 3 को ही जिता पायी। रालोद के 10 में से 4 प्रत्याशी ही जीत पाए।

सपा का मुस्लिम-यादव फैक्टर इस चुनाव में खूब चला। आजमगढ़, मऊ, गाजीपुर में सपा को इसका फायदा दिखा। भाजपा की रिपोर्ट में एक फैक्टर यह भी है कि सपा सवर्ण वोट इस बार अच्छा मिला है।सपा ने जहां से सवर्ण उम्मीदवार को टिकट दिया वहां उस जाति का सवर्ण वोट समाजवादी पार्टी को मिला था।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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