सलमान खुर्शीद और सारे मुसलमानों को हिंदुत्व शब्द से चिढ़ क्यों है ?

-जैसे किसी सेना को इकट्ठा करने के लिए कोई झंडा चाहिए होता है और एक राजा चाहिए होता है ठीक उसी तरह आज लोकतंत्र के युग में लोगों को इकट्ठा करने के लिए एक विचारधारा की जरूरत होती है
-दुर्भाग्य से हिंदू जातियों में बंटा रहा और उसने कभी जातियों को जोड़कर संगठित होने का प्रयास ही नहीं किया इसलिए बल पौरुष धैर्य सब में श्रेष्ठ होने के बाद भी… सिंहत्व होने के बाद भी उसे सियारों की भी गुलामी झेलनी पड़ गई
- आठवीं सदी में यानी आज से करीब 1300 साल पहले मुहम्मद बिन कासिम के रूप में सिंध पर इस्लाम का पहला सफल आक्रमण हुआ… इससे पहले जो हुए वो असफल हुए थे…
-इस्लाम एक विचारधारा थी… जो अरब से शुरू हुआ और उसने दुनिया के तमाम देशों पर अरब की संस्कृति को थोपने की कोशिश की और इसमें सफल भी हुआ… पूरी दुनिया के तमाम देशो के लोग… चाहे वो ईरानी हों… इराकी हों… सीरियाई हों… इंडोनेशियाई हों… चाहे किसी भी देश के मुसलमान हों… लेकिन वो दिन में 5 बार अरब की धरती के सामने मुंह करते हैं और फिर जाने अनजाने अरब की धरती को ही सलाम ठोंकते हैं… इस्लाम अरब देश का एक राष्ट्रवाद ही तो था जिसका मकसद सबको अरब का गुलाम बनाना था और आज वही हो भी रहा है… पाकिस्तान के भी मुसलमान दिन में पांच बार अरब की धरती की तरफ मुंह करके अरब को सलाम ठोंकते है
-इस्लाम को सफलता इसलिए मिलती चली गई क्योंकि अपने लोगों को गुटबंद करने के लिए उसके पास एक विचारधारा थी… लेकिन हिंदुओं के पास ऐसी कोई विचारधारा ही नहीं थी… जिसको सब लोग मानें और सब एक जुट हो जाएं
-वीर सावरकर ने इस कमी को समझा इसलिए उन्होंने हिंदुत्व शब्द की रचना की और हिंदुत्व नाम की एक किताब भी लिखी… जिसके माध्यम से हिंदुओं की समस्त जातियों को एक धागे में पिरो देने की कोशिश हुई
(नोट- कई मित्रों ने मेरा नंबर 9990521782 को दिलीप नाम से सेव तो कर लिया है लेकिन मिस्ड कॉल नहीं की है… जो मित्र मुझे मिस्ड कॉल भी करेंगे और मेरा नंबर भी सेव करेंगे… यानी ये दोनों काम करेंगे सिर्फ उनको ही मेरे लेख सीधे व्हाट्सएप पर मिल पाएंगे…क्योंकि मैं ब्रॉडकास्ट लिस्ट से ही मैसेज भेजता हूं और इसमें मैसेज उन्हीं को मिलेगा जिन्होंने मेरा नंबर सेव किया होगा… जिन मित्रों को मेरे लेख व्हाट्सएप पर पहले से मिल रहे हैं वो मिस्ड कॉल ना करें… प्रार्थना है)
-इस कोशिश में वीर सावरकर को सफलता मिली लेकिन वो इस सफलता को देखने के लिए जिंदा नहीं रहे… जब 2014 में पहली बार वीर सावरकर के हिंदुत्व की बात करने वाली पार्टी बीजेपी को बहुमत मिला और मोदी प्रधानमंत्री बन गए तो वो दरअसल सावरकर और उनके हिंदुत्व की ही विजय थी और जो सपना उन्होंने देखा था हिंदुओं को एक जुट करने का… वो आखिरकार साकार हो गया
-यही वजह है कि जितने भी जिहादी, कम्युनिस्ट, सेकुलर और मुसलमान हैं वो सावरकर और हिंदुत्व से बहुत ज्यादा नफरत करते हैं क्योंकि उनकी अत्याचारी विचारधारा के खिलाफ लड़ने के लिए हिंदुओं को एक विचारधारा मिल गई जिसका नाम हिंदुत्व है
-अब देखिए… सलमान खुर्शीद ने अपनी किताब सनराइज ओवर अयोध्या में क्या लिखा ? सलमान खुर्शीद ने लिखा जो सनातन धर्म कभी साधु संतों का था उसको हिंदुत्व ने बोको हराम जैसा बना दिया…. दर्द को समझिए… सलमान खुर्शीद का दर्द ये है कि हिंदू धर्म साधु सतों का ही होता तो अच्छा होता… हम जिहादी आराम से हिंदुओं के अधिकारों का हनन करते जैसे पहले करते आ रहे थे लेकिन अफसोस कि अब हिंदुत्व की विचारधारा ने उनको एक, जगह और जाग्रत कर दिया है । यही सारे मुसलमानों और जिहादियों की पीड़ा है
-सलमान खुर्शीद को अपनी किताब में ये जरूर बताना चाहिए था कि आखिर बोको हराम का मतलब क्या होता है ? इंटरनेट पर विश्व ज्ञान कोश में लिखा हुआ है कि बोको हराम का आधिकारिक नाम है जमात अहल अल सुन्ना दावा अल जिहाद… अरबी भाषा में इसका मतलब है… वो लोग जो पैगंबर मुहम्मद के जिहाद और इस्लाम के प्रचार की शिक्षा के लिए समर्पित हैं… सलमान खुर्शीद को अपना आईना देखना चाहिए और खुद के मजहब में मौजूद कट्टरता को खत्म करने का प्रयास करना चाहिए