
अंग्रेजी टीचर थे बाद में पता चला वे मूल रूप से अर्थ शास्त्र के प्रवक्ता हैं । कक्षा में अपने पुत्रों से आम छात्रों की तरह पूछ ताछ और सजा बिना किसी भेदभाव के । स्पेलिंग में जिंतनी गलती उतनी सांटें । वे भदावर विद्यालय के दूसरे प्रवक्ता थे जो पीरियड लेना नहीं भूलते थे । पहले ब्रजभूषण जी । मासाहब की पत्नी हमारीं बहनजी श्रीमती मुन्नी देवी की भी यही आदत रही ।
आज 24 को मुझे पता चला मासाहब नहीं रहे । सितंबर में आगरा स्थिति अपने आवास पर बहनजी के साथ इलाज के लिए आये थे । वही तेज मगर उम्र विभिन्न अंग की अकर्मण्यता दर्शा रहे थे । बहुत बड़ा नुकसान हुआ है । हालांकि वे पटियाली प्रधानचार्य होकर चले गए थे व बहन जी भी गंज डुंडवारा प्राचार्य हो गईं थीं । 89 में प्रवीण से मुलाकात हुई । फिर आना जाना शुरू हुआ । वे सामाजिक अभिवावक थे । उनकी कमी …
संस्मरण किताब बन जाएंगे जो सभी अर्थ शास्त्र के सिद्धान्त होंगे ।नमन … उन्होंने ईश्वर से भी व्यवस्था तय कर ही रुख्शत किया होगा । नमन
शंकर देव तिवारी
प्रसिद्ध शिक्षा विद अर्थ शास्त्री डॉक्टर खूब सिंह चौहान नहीं रहे । वे समकालीन चौथी दुनिया पत्रिका के प्रधान संपादक डाक्टर प्रवीण चौहान के पिता पत्रिका के संस्थापक भी थे । 83 वर्ष की उम्र में उन्होंने 23 मई 21 को गंजडुंडवारा स्थिति निवास पर अंतिम सांस ली। वे पटियाली में इंटर कालेज के प्रधानचार्य होने से पहले बाह में अर्थ शास्त्र के प्रवक्ता भी रहे थे । उनका दाह संस्कार 24 मई सोमवार को प्रातःकाल सादर गंज के गंगा घाट पर हुआ । उनके बड़े पुत्र विनीत ने मुखग्नि दी । इस समय प्रवीण व छोटू भी मौजूद थे ।
वर्तमान दौर को देखते हुए प्रवीण चौहान ने कहा है सभी घर ही रहे दुःख व्यक्त +91 88004 63160 नम्बर पर व्हाट्सएप पर व्यक्त कर सकते हैं ।