*गंभीर लापरवाही*
एटा,यह दृश्य आज का है एटा शहर में यह दृश्य कमोवेश घंटाघर हाथी गेट या मेन बाजार में देखा जा सकता है।
सिर्फ बाबूगंज ऐसा जो पूरी तरह से लॉक डाउन का पालन कर रहा है।
शहर के लोग इतने लापरवाह कैसे हो सकते हैं?
बाजार का आलम यह है कि हर आदमी को विजली का सामान भी चाहिए , पानी की टंकी भी अभी सही करानी है , मोटर सायकिल की सवर्सिग भी अभी ही होनी है ।
ओर व्यापारियों के बारे में क्या कहें?
सारे विजनेस अभी ही करने है दुकाने बंद है तो क्या हुआ मोबाइल तो चालू है फोन करो और घर आ जाओ जो चाहे समान ले जाओ , और हां अगर फोन खराब है तो वह भी मिलेगा और रिपेयरिंग भी होगा, शर्त सिर्फ इतनी है घर आना होगा और रेट मुँह मांगा देना होगा।
जीवन के प्रति इतनी लापरवाही निसंदेह चिंताजनक है।
लापरवाह सिर्फ आम आदमी या व्यापारी नहीं प्रशासन भी है।
लेखपाल साहव (जिला अधिकारी महोदय ) किसी अनहोनी का इंतजार कर रहे है ।
जिले में न स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर है। ना तो आईसीयू है ना ही वेंटिलेटर उपलब्ध है।
फिर भी आम आदमी इस मुगालते में जी रहा है कि हमें कुछ नहीं हो सकता।
जिले का स्वास्थ्य विभाग रेफर करने में माहिर है।
यदि जिले के स्वास्थ्य विभाग का रेफर करने का रिकॉर्ड निकाला जाए तो शायद गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में एटा नंबर वन पर होगा।
क्या लोगों को जानबूझकर एक सोची समझी रणनीति के तहत मौत के मुंह में भेजा जा रहा है ?
या प्रशासन इस लॉक डाउन को पूर्णता है लागू करने में अक्षम है।
शहर में दोपहिया ओर चारपहिया वाहन फर्राटे भर रहे हैं कोई इन्हें रोकने वाला टोकने वाला नहीं है।
इस लापरवाही के गंभीर परिणाम बहुत जल्द सामने आएंगे।
एटा के जनमानस का स्वास्थ्य भगवान भरोसे है।
कहीं ये लापरवाही एटा के लोगों को काल के गाल में ना समा दे ।