Uttar Pradesh Weather : अगले 48 घंटों में फिर से तेज आंधी और बारिश के आसार, पड़ सकते हैं ओले

उत्तर प्रदेश के अधिकांश जिलों में रविवार को तेज आंधी और बारिश ने ने अपना रौद्र रूप दिखाया और 40 लोगों की जिंदगी निगल ली। आसमान में घिरे घने बादलों के कारण दिन में ही अंधेरा छा गया। बड़ी संख्या में पेड़ और बिजली के खंभे उखड़ गए। मौसम विभाग ने फिर से अगल 48 घंटों में पूरे उत्तर प्रदेश में तेज आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश के आशंका जताई।

मौसम निदेशक जेपी गुप्त ने बताया कि अगले दो दिन पूरे प्रदेश में तेज आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश होने के आसार हैं। तीसरे दिन पश्चिमी यूपी में छिटपुट बारिश हो सकती है। इलके अलावा कहीं-कहीं ओले भी पड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि मध्य पाकिस्तान के ऊपर केन्द्रित पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवातीय दबाव की वजह से मौसम में यह बदलाव हुआ है।

बेमौसम आंधी-बारिश ने बरपाया कहर
उत्तर प्रदेश में रविवार शाम एक बार फिर मौसम का मिजाज बदला और धूलभरी आंधी से दिन में ही घनघोर अंधेरा छा गया। आंधी, पानी, ओलावृष्टि और वज्रपात ने खूब तबाही मचाई। इससे टिनशेड, छप्पर विद्युत पोल, होर्डिंग, बैनर और लॉकडाउन के लिए लगाए पुलिस कैंप और तंबू उखड़ गए। फसलों और आम बागवानी को भी काफी नुकसान पहुंचा है। मौसम से जुड़े हादसों में 40 लोगों की मौत की हो गई है।

मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए की आर्थिक सहायता
उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त संजय गोयल ने जिलाधिकारियों से कहा है कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता जल्द दी जाए। इसके साथ ही उन्होंने फसलों के नुकसान के बारे में जानकारी मांगी है।

आम की 50% फसल बर्बाद
लखनऊ के मलिहाबाद फलपट्टी में 10 दिन में तीसरी बार आंधी-बारिश आई। आंधी से अभी तक लगभग 50 फीसदी आम की फसल बर्बाद हो चुकी है। बागवानों का कहना है कि अभी आम में गुठली भी नहीं बन पाई है। ऐसे में आंधी से गिरा आम चटनी, गलका आदि में ही प्रयोग हो सकता है। वहीं माल, मलिहाबाद और रहीमाबाद में आंधी से कई पेड़ भी गिर गए।

उत्तराखंड में तेज आंधी और बारिश से पांच लोगों की मौत
उत्तराखंड में रविवार दोपहर भीषण-आंधी तूफान ने पांच लोगों की जान ले ली। जबकि तीन लोग घायल हो गए। आंधी के कारण हरिद्वार, रुड़की में दिन में ही अंधेरा छा गया। देहरादून, मसूरी समेत पहाड़ के कई स्थानों में झमाझम बारिश के साथ आयी आंधी से बिजली लाइनों और फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।

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