सरकारी कमाई बढ़ाने के चक्कर मे खुली शराब की दुकानें कहीं सरकार को डबल खर्च की ओर न धकेल दें

सरकारी कमाई बढ़ाने के चक्कर मे खुली शराब की दुकानें कहीं *सरकार को डबल खर्च की ओर न धकेल दें*

बड़ी मुसीबतों से सरकार के साथ पुलिस ने दिन रात जागकर,भूखे-प्यासे रहकर,अपनी जेब से भूखों को खाना खिलाने, लॉकड़ाउन का सही से पालन करने के लिए कभी डंडे चलाये कभी हाथ जोड़े,तो कभी गाने सुनाए,कभी डांस किया।पर इन सब पर भारी नि पड़ जाए शराब की दुकानों को खोलने का आदेश !

घर पर भी पहुंच सकती थी शराबियों के लिये शराब !
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जब आम आदमी सब कुछ बन्द होने पर भी पान मसाला पाँच रुपये वाला बीस रुपये का खरीद कर खा सकता है,सिगरेट की डिब्बी दो सौ रुपये की लेकर पी सकता है तो ऐसी अधूरी तैयारी करने के बजाय यदि शराब बेचने वालों को और कुछ नम्वर की सहायता से घर बैठे शराब मिलने का आदेश दिया जाता तो भले ही रेट में कुछ बढ़ोत्तरी करके शराब मिलने का आदेश दिया जाता तो न लॉकड़ाऊंन का उल्लंघन होता और न ही पुलिस,डॉक्टर,सफाईकर्मी,समाज सेवक,पत्रकारों की ,डॉक्टर,सफाईकर्मी,समाज सेवक,पत्रकारों की मेहनत पानी फिरता।

शराबियों ने घर की बच्चियों को लगाया लाईन में शर्म बड़ी या शराब
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शराब मिलने की खुशखबरी में लोग हदों को पार करते दिखे कहीं सुबह अंधेरे से ही जुगाड़ में लगे रहे,कहीं अपने छोटे छोटे बच्चोँ को लाईन में लगाया जैसे अम्रत मिलने की भीड़ लगी हो।कहीं कहीं तो झोले में इतनी अत्यधिक शराब खरीद कर भर ली कि झोला उठाये नही उठ रहा,यही लोग हैं जो सरकार को अभी कुछ दिन पहले कोस रहे थे कि सरकार राशन नही दे रही,सब भूखे हैं,कैसे घर का खर्च चलेगा अब सभी की अमीरी दिखने लगा मात्र एक सरकारी आदेश पर

सरकार को चाहिए कि देश सुरक्षित रखना हो तो तत्काल एक दो दिनों तक शराब बिक्री के बाद बन्द कर दे शराब
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शराब की बिक्री से जरूर आय होगी पर एक दो दिनों के बाद फिर से बंद कर देना चाहिए ऐसा एक पत्रकार की सोच है ताकि तेजी से फैलते इस कोरोना वायरस की बढ़ने की बजाय रोकने को ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए। *वैसे यह आदेश उन कोरोना वारियर्स की मेहनत पर पानी फेरने वाला आदेश है।*

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