नेपाल ने चट्टान काटकर बनाया चीन सीमा पर बसे छांगरू-तिंकर को जोड़ने वाला पैदल मार्ग

नेपाल सेना ने दार्चुला से चीन सीमा पर स्थित छांगरू-तिंकर को जोड़ने वाले पैदल मार्ग को दुरुस्त कर लिया है. कल सुदूर पश्चिम के मुख्यमंत्री त्रिलोचन भट्ट ने पैदल मार्ग का उद्घाटन किया. भारत ने जब से लिपुलेख तक सड़क का निर्माण किया है तबसे नेपाल बौखलाया हुआ है. नेपाल ने भारतीय क्षेत्र कालापानी, लिपुलेख और नाभिढांग को न केवल अपने नक्शे में शामिल कर लिया है, बल्कि भारतीय सीमा पर अपनी सैन्य क्षमता और अन्य सुविधाएं भी बढ़ा दी हैं.
अब तक नेपाल के पास चीन सीमा पर स्थित अपने अंतिम गांव छांगरू और तिंकर तक पहुंचने के लिए पैदल रास्ता भी नहीं था. नेपाल के माइग्रेशन वाले परिवारों को भारतीय क्षेत्र से होकर आवागमन करना पड़ता था. छांगरू में बीओपी खोलकर सेना की तैनाती करने के बाद नेपाल सरकार ने सीमा तक सड़क और पैदल रास्ता बनाने का काम नेपाल सेना को सौंप दिया है.
नेपाल सेना ने काली नदी के किनारे से होकर छांगरू जाने वाले 80 किमी पैदल मार्ग पर बाधा बनी 550 मीटर लंबी चट्टान काटकर पैदल मार्ग बना दिया है. इस मार्ग का उद्घाटन करने के लिए सुदूर पश्चिम राज्य के मुख्यमंत्री त्रिलोचन भट्ट हेलीकॉप्टर से दार्चुला पहुंचे. दार्चुला से प्रस्तावित लगभग 134 किमी लंबी सड़क पर 40 किमी सड़क का निर्माण हो गया है. शेष सड़क का काम शीघ्र ही शुरू किया जाएगा.