श्राद्ध पक्ष की कथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, मंगल कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का दिव्य शुभारंभ

बरेली, फरीदपुर । श्राद्ध पक्ष के पावन पुण्यकाल में पितृ ऋण से मुक्ति, पूर्वजों की अक्षय शांति तथा दिवंगत स्वजनों की सद्गति एवं परम शांति की मंगलकामना के साथ फरीदपुर के मोहल्ला महादेव स्थित प्राचीन श्री पंचेश्वरनाथ महादेव मंदिर प्रांगण में रविवार को भव्य श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञानयज्ञ का विधिवत एवं भक्तिमय शुभारंभ हुआ। प्रथम दिवस आयोजित मंगल कलश यात्रा और कथा श्रवण में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। पूरे क्षेत्र में दिनभर भक्ति, आस्था और धार्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा।

ज्ञानयज्ञ के प्रथम दिवस प्रातः श्री रामजानकी मंदिर से भव्य मंगल कलश यात्रा निकाली गई। पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित महिलाओं ने अपने मस्तक पर मंगल कलश धारण कर श्रद्धा एवं भक्ति के साथ नगर भ्रमण किया। ढोल-नगाड़ों, वेदमंत्रों, भजन-कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन की मधुर ध्वनि से नगर का वातावरण भक्तिमय हो उठा। मार्ग में श्रद्धालुओं एवं नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया। जय श्रीराम, हर-हर महादेव और राधे-राधे के जयघोष से नगर गुंजायमान रहा। यात्रा का समापन प्राचीन श्री पंचेश्वरनाथ महादेव मंदिर प्रांगण में हुआ, जहां विधि-विधानपूर्वक देव पूजन एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए।

इसके उपरांत कथा मंडप में श्रीधाम अयोध्या से पधारे परम पूज्य कथा व्यास श्री श्री गजानंद जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के महात्म्य का रसपूर्ण एवं आध्यात्मिक विवेचन किया। उनकी ओजस्वी एवं भक्तिरस से परिपूर्ण वाणी से कथा मंडप में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। महाराज श्री ने श्रीमद्भागवत के श्रवण, स्मरण एवं सत्संग के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति, सदाचार और ईश्वर के प्रति समर्पण का संदेश दिया।

कथा के दौरान महाराज श्री ने बताया कि श्राद्ध पक्ष सनातन परंपरा में पितरों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और तर्पण का विशेष काल माना गया है। इस अवधि में धार्मिक अनुष्ठान, कथा श्रवण, दान-पुण्य एवं सत्कर्म करने से मनुष्य को आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है। श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को भक्ति एवं ज्ञान के मार्ग पर अग्रसर करते हुए जीवन के वास्तविक उद्देश्य का बोध कराती है। कथा व्यास के श्रीमुख से निकले अमृतमयी वचनों को सुनकर श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक कथा का रसपान किया।

इस धार्मिक आयोजन में आचार्य हिमांशु तिवारी, महंत राजकुमार दास, आचार्य शिवम शास्त्री, राम प्रकाश शास्त्री एवं बालयोगी वैभव पंडित सहित अन्य सहयोगी आचार्य बंधुओं की भी महत्वपूर्ण सहभागिता रही। आयोजन को सफल बनाने में मंदिर समिति एवं श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक सहयोग किया।

प्रथम दिवस की पूजा के मुख्य यजमान दुजेंद्र कुमार मिश्रा के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता कर पुण्यलाभ प्राप्त किया। मंदिर प्रांगण में दिनभर श्रद्धालुओं का आवागमन बना रहा और वातावरण भक्ति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत रहा।

श्री पंचेश्वर नाथ महादेव मंदिर मंदिर के प्रधान अर्चक आचार्य संजीव कुमार मिश्रा ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आयोजन 27 सितंबर से 3 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन अपराह्न 2 बजे से सायं 7 बजे तक किया जाएगा। वहीं 4 अक्टूबर को पितृ शांति महायज्ञ, पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं से अपने दिवंगत माता-पिता एवं पितरों की आत्मिक शांति के निमित्त ‘एक दिवसीय यजमान’ बनकर धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता करने का आह्वान किया। इच्छुक श्रद्धालु अपना नाम एवं गोत्र पूर्व में पंजीकृत करा सकते हैं।

आयोजन समिति ने क्षेत्रवासियों से सपरिवार कथा स्थल पर पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने, पितृ शांति महायज्ञ में आहुति देने तथा महाप्रसाद ग्रहण कर पुण्यलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया है।

आयोजन स्थल: प्राचीन श्री पंचेश्वरनाथ महादेव मंदिर प्रांगण, मोहल्ला महादेव, फरीदपुर, बरेली।
संपर्क: 9411034900, 9557145341।

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पं.सत्यम शर्मा

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