
बरेली। शरीर में जब कोई बीमारी दस्तक देती है, तो शुरुआत में हम हल्के-फुल्के बदलावों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कैल्शियम सिर्फ हड्डियों और दांतों के लिए ही नहीं, बल्कि मांसपेशियों, नसों और दिल के सही कामकाज के लिए भी बेहद जरूरी है? जब शरीर में इसकी कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह कई गंभीर बीमारियों का रूप ले लेती है।
शरीर में कैल्शियम की कमी के 6 बड़े लक्षण
मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द: पैरों, हाथों या कमर की मांसपेशियों में अचानक खिंचाव या रात में पैरों में ऐंठन होना कैल्शियम की कमी की ओर इशारा करता है।
हाथ-पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन: कैल्शियम नसों के काम को प्रभावित करता है। इसके स्तर में गिरावट से हाथों, पैरों, उंगलियों या होंठों में सुई चुभने जैसा अहसास या सुन्नपन महसूस हो सकता है।
कमजोर हड्डियां (ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा): शरीर में कैल्शियम कम होने पर यह हड्डियों से कैल्शियम खींचना शुरू कर देता है, जिससे हड्डियों का घनत्व (डेंसिटी) घट जाता है और मामूली चोट पर भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
दांतों की समस्याएं: दांत कमजोर होना, दर्द, संवेदनशीलता (सेंसिटिविटी) या कैविटी की समस्या भी कैल्शियम की कमी से तेजी से बढ़ सकती है। बच्चों में यह दांतों के विकास को भी प्रभावित कर सकता है।
लगातार थकान और कमजोरी: पर्याप्त आराम के बावजूद शरीर में ऊर्जा की कमी और हर वक्त कमजोरी महसूस होना पोषक तत्वों के असंतुलन का संकेत हो सकता है।
नाखूनों का कमजोर और पतला होना: इसका असर नाखूनों पर भी दिखता है; वे पतले, कमजोर होकर आसानी से टूटने लगते हैं।
कैल्शियम की कमी के मुख्य कारण
आहार में कैल्शियम युक्त चीजों की कमी।
विटामिन-डी की कमी, जिसके कारण शरीर कैल्शियम को ठीक से अवशोषित (Absorb) नहीं कर पाता।
उम्र बढ़ने के साथ कैल्शियम का कम अवशोषण।
हार्मोनल बदलाव या कुछ दवाओं का लंबे समय तक सेवन।
दूध और डेयरी उत्पादों का कम सेवन।
बचाव के आसान उपाय
डेयरी उत्पाद शामिल करें: दूध, दही और पनीर का नियमित सेवन करें।
हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी जैसी हरी सब्जियां डाइट में जरूर रखें।
कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ: तिल, बादाम और रागी को अपनी दिनचर्या में जोड़ें।
धूप लें: विटामिन-डी का स्तर सही रखने के लिए रोजाना कुछ समय धूप में बिताएं।
संतुलित आहार व व्यायाम: पौष्टिक खान-पान के साथ नियमित रूप से हल्का व्यायाम करें।