
बरेली । नवाबगंज स्थित वृहद गोवंश संरक्षण केंद्र मधुनगला से हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां गोवंशों की सुरक्षा और देखरेख की पोल खुल गई है। जिला स्तरीय जांच में खुलासा हुआ कि अगस्त 2025 से अप्रैल 2026 के बीच भूख और कुपोषण के चलते 54 गोवंशों की मौत हो गई, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में सिर्फ 5 मौतें दर्ज की गईं।
जांच में सामने आया कि पशु चिकित्साधिकारी द्वारा 54 मौतों के प्रमाण पत्र जारी किए गए थे, लेकिन लॉग बुक पंजिका में आंकड़ों को दबा दिया गया। यह बड़ा खुलासा जिला विकास अधिकारी दिनेश यादव और मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी मनमोहन पांडेय की संयुक्त जांच में हुआ, जिसके बाद विभागों में हड़कंप मच गया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि गोशाला में चारे और भूसे का भारी संकट है। हालत इतनी खराब है कि 30 से 40 गोवंश कुपोषण के चलते कंकाल जैसे दिखाई दे रहे हैं। पिछले साल अगस्त में गोशाला के बाहर 17 गोवंशों के शव मिलने के बाद से यह केंद्र जांच के घेरे में था।
रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में 9, दिसंबर में 10 और अकेले अप्रैल 2026 में 16 गोवंशों की मौत हुई। जब अधिकारियों ने रिकॉर्ड में गड़बड़ी को लेकर ग्राम प्रधान, डॉक्टर और केयरटेकर से सवाल किए तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका।
डीडीओ दिनेश यादव ने बताया कि पूरी रिपोर्ट सीडीओ को भेज दी गई है। वित्तीय अनियमितता और गोवंश संरक्षण में लापरवाही के आरोप में ग्राम प्रधान को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। वहीं बीडीओ, एडीओ पंचायत, पशु चिकित्सा अधिकारी और ग्राम पंचायत सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।