
एटा,, जिला मजिस्ट्रेट प्रेम रंजन सिंह ने सूचित किया है कि तहसील एटा सदर क्षेत्र के ग्राम रिजोर में खुदाई के दौरान प्राप्त एक प्राचीन मूर्ति को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एएसआई के अधीन सुपुर्द किए जाने का निर्णय लिया गया। उन्होंने सूचित किया ग्राम रजोर में जल निगम द्वारा ओवरहेड टैंक के निर्माण हेतु किए जा रहे खुदाई कार्य के दौरान गाटा संख्या 479 ख, रकबा 10.383 हे. भूमि (जो ग्राम समाज की श्रेणी 6(2) की आबादी भूमि है) से एक प्राचीन मूर्ति प्राप्त हुई। इस मूर्ति की प्राप्ति के बाद जैन और बौद्ध समुदायों में विवाद उत्पन्न हो गया। शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु 22 जून 2025 को उक्त मूर्ति को थाना रजोर को सुपुर्द किया गया।
एएसआई आगरा सर्किल द्वारा किए गए निरीक्षण में यह पुष्टि हुई कि मूर्ति जैन पंथ से संबंधित है और उसमें ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व निहित है। प्रारंभिक अध्ययन में इसे दसवीं से ग्यारहवीं शताब्दी ईस्वी का माना गया है, जो इसे पुरावशेष की श्रेणी में लाता है। साथ ही 100 वर्ष से अधिक पुरानी वस्तु को प्राचीन वस्तु की मान्यता प्राप्त होती है। केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि यदि कोई मूर्ति सार्वजनिक स्थल पर सुरक्षित रखना वांछनीय हो तो वह उसे अपने अधीन ले सकती है। जांच में यह स्पष्ट पाया गया कि यह मूर्ति किसी व्यक्ति विशेष की भूमि से नहीं, बल्कि ग्राम समाज की भूमि से प्राप्त हुई है, अतः किसी प्रकार का व्यक्तिगत स्वामित्व दावा मान्य नहीं है और किसी व्यक्ति को नोटिस जारी किया जाना आवश्यक नहीं है।
इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए, उक्त प्राचीन मूर्ति को औपचारिक रूप से अधीक्षक पुरातत्वविद डॉ. स्मिता एस. कुमार को हस्तगत कर दिया गया है, ताकि इसका विधिवत संरक्षण, अध्ययन और ऐतिहासिक संदर्भ में उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।