पर्यावरण के प्रति कितनी सजग है RCCPL (एमपी बिरला) सीमेंट फैक्ट्री?

पर्यावरण के प्रति कितनी सजग है RCCPL (एमपी बिरला) सीमेंट फैक्ट्री?
मैहर  (एमपी बिरला) सीमेंट फैक्ट्री द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए जा रहे दावों पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। सडेरा, सलैया और घोरवई क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि फैक्ट्री के संचालन से पर्यावरण संतुलन बिगड़ रहा है। हालांकि, इस पर उद्योग प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन मौन साधे हुए हैं।
पर्यावरण संरक्षण के दावे या दिखावा?
फैक्ट्री प्रबंधन द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन स्थानीय निवासियों के अनुसार, इन दावों का धरातल पर कोई प्रमाण नहीं है। धूल और धुएं के प्रदूषण ने आसपास के गांवों की हवा और जल स्रोतों को प्रभावित किया है। पेड़-पौधों की कटाई और क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण से न केवल जैव विविधता को नुकसान पहुंचा है, बल्कि ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल:
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि फैक्ट्री के पक्ष में स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभाग आंखें मूंदे हुए हैं। वे केवल कागजों पर सब कुछ ठीक दिखाने की कोशिश करते हैं और उद्योग की तरफ से वकालत करते नजर आते हैं। सवाल यह है कि जब पर्यावरण संतुलन से जुड़े इतने गंभीर मुद्दे हैं, तो प्रशासन या उद्योग प्रबंधन खुलकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करते?
लोकायुक्त की जांच की मांग:
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि RCCPL के पर्यावरण संरक्षण से जुड़े दावों और वास्तविकता का खुलासा लोकायुक्त जैसी किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी के माध्यम से ही संभव है। फैक्ट्री द्वारा पर्यावरण के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए हैं और क्या यह क्षेत्र के पर्यावरण को सुधारने में सक्षम है, इन सभी सवालों के जवाब देने का समय आ गया है।
नागरिकों की मांग:
ग्रामीणों ने मांग की है कि उद्योग प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन यह स्पष्ट करें कि सडेरा, सलैया और घोरवई क्षेत्र में पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए अब तक क्या-क्या कार्य किए गए हैं। यदि वे वास्तव में पर्यावरण के प्रति सजग हैं, तो इसका प्रमाण जनता के सामने पेश करें।

पर्यावरण की रक्षा करना न केवल उद्योग प्रबंधन की, बल्कि स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की भी जिम्मेदारी है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह क्षेत्र पर्यावरणीय आपदा का सामना कर सकता है। अब देखना यह है कि क्या इस मामले में कोई कार्रवाई होगी, या फिर यह मुद्दा भी कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगा।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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