
सपा, कांग्रेस मुस्लिम वोटों के लिए संभल-संभल कर रही : मायावती, बसपा सुप्रीमो
मेरा आकलन रहता था कि भाजपा यूपी से बसपा को खत्म नहीं कर सकती , क्यूंकि उसे मान्यवर कांशीराम ने लहू से सींचकर बड़ा किया है. पर हम यह भूल गये कि बसपा निजाम ने 2007 से 2012 तक कांशीराम के खून-पसीने से तैयार पेड़ के फल खा लिये…फिर बसपा के वैचारिक वट वृक्ष बन रहे रामाधीन सिंह , दीनानाथ भास्कर , राज बहादुर , डॉ मसूद अहमद ,सोने लाल पटेल , बृजलाल खाबरी , बरखू राम वर्मा , आरके चौधरी , दददू प्रसाद , बाबू सिंह कुशवाहा , अहिरवार , स्वामी प्रसाद मौर्य , नसीमुद्दीन सिद्दीकी ( प्रबंधक ), प्रदीप सिंह ( पूर्व एमएलसी ) , नकुल दुबे , राम प्रसाद चौधरी , लाल जी वर्मा ( सपा सांसद ) को ‘काट’ ( निकाल ) दिया. इमरान मसूद (सांसद ), कादिर राणा , याकूब कुरैशी, रामवीर उपाध्याय भी ऐसे ही थे.
अब आज बसपा सुप्रीमो ने जो बयान दिया है, उसका निष्कर्ष है कि 2027 में वह भाजपा के साथ चुनावी समर में जा सकती हैं. अगर नहीं गई तब यूपी के चुनावी अखाड़े में सिर्फ तीन लड़ाके बचेंगे !
1-भाजपा
2-सपा
3-कांग्रेस
यह सब देख मान्यवर कांसीराम की आत्मा “सत्य के देवता” के साथ ‘आनंद’ से आनंदित तो नहीं हो रही होगी , न ‘आकाश’ पर हर्षित होगी ?