स्वास्थ विभाग के जांच दल की वैधानिकता परउठे कई सवाल..!

जैथरा में हेल्थ टीम के बंधक बना कर जानलेवा हमला करने का दुर्दांत मामला

एटा। जिले के जैथरा ब्लाक के अंतर्गत अपंजीकृत खोला छाप। हिकित्सक के विरुद्ध कार्यवाही करने गई टीम पर हुआ जानलेवा हमला बंधक बनाने जिंदा वीडियो फुटेज देख कर सभी हतप्रभ रह गए है वही इस अभियान में बरती गई लापरवाहियां एवं हद दर्जे की चूक के पीछे स्वास्थ अधिकारियों की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं।
घटना क्रम के अनुसार बीते गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी के निर्देश पर जैथरा के ग्राम सिहोरो में अपंजीकृत झोलाछाप यतेंद्र यादव के क्लीनिक की जांच करने पहुंचीं ड्राइवर सहित दो सदस्यीय टीम डिप्टी सी एम ओ डा सर्वेश की अगुआई में पंहुची जहां झोलाछाप चिकित्सक ने अपने मरीजों की तीमारदार समर्थको के साथ घेर कर पीटा और एक खाली दुकान का शटर उठा कर बंद कर लिया।इस दौरान घटना का वीडियो बना कर लाखों के लेनदेन करने की बाते कहीं गई इस दौरान पूरी टीम गिड़गिड़ा कर रहम की भीख मांगती नजर आई। हालांकि समाचार लिखे जाने तक संगीन धाराओं में जैथरा थाने में मुकदमा दर्ज कर कड़ी कारवाही की दिशा में पुलिस प्रयत्नशील है। इस दुर्दांत वाकए के बाद नियमों के तहत प्रेस द्वारा जांच रेड सील कार्यवाही करने की गाइड लाइन देखी गई तो स्वास्थ विभाग की पिछले ढाई साल से चल रही कथित छपेमारी पर सवाल उठने लगे हैं। उच्च न्यायालय एवं शासनादेश की रोशनी में देखा जाए तो स्पष्ट किया गया है अस्पतालों की जांच,अपंजीकृत झोलाछाप आदि की रेड सील आदि के एक्शन डीएम इस पी एवं सी एम ओ द्वारा संयुक्त दल बना कर की जाएगी। इस संबंध में खुद सी एम ओ डा उमेश कुमार त्रिपाठी के द्वारा मार्च 2024 को एक आर टी आई जवाब में लिखित रूप से अवगत कराया है कि डीएम , एस पी, सी एम ओ जिला स्तरीय टीम में हैं सी एम ओ द्वारा नामित अधिकारी डा राम मोहन तिवारी ए सी एम ओ, डा सर्वेश कुमार डिप्टी सी एम ओ हैं। अब सवाल उठता है जब पूर्व में गठित टीम क्रियाशील थी तो सिर्फ डिप्टी सी एम ओ को क्यों भेजा गया ? जबकि नियमानुसार स्वास्थ विभाग के दोनो अधिकारियों सहित पुलिस और प्रशासन के नामित अधिकारी होने चाहिए।आखिर क्यों सिर्फ डिप्टी सी एम ओ को भेज कर यह महत्वपूर्ण अभियान चलाया जाता रहा है। यहय यह बताना समीचीन प्रतीत होता है वर्तमान दी एम ओ से पूर्व पहले चले इस तरह के अभियान में पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद रहते थे उप जिलाधिकारी स्वर से कम प्रशासनिक अधिकारी नही रहते थे। स्वाभाविक है एस डी एम होंगे तो पुलिस बल पर्याप्त संख्या में होगा ही। परन्तु वर्तमान सी एम ओ ने नई परिपाटी को जन्म दिया। बताया जाता है यह लापरवाहियां संयोग वश नही हुई है ये सुनियोजित योजना है यह आंशका व्यक्त की जा रही है ?
वीडियो फुटेज में लेमडेन की बार कह कर इस आशंका को बाल दिया है कि हो न हो विभाग के निर्देशन में चल रहा यह दल धन बडूली का अभियान रहा है फुटेज इस बात की सरे आम चुगली कर रहा है।
जानकर मानते हैं यदि स्वास्थ विभाग के पिछले ढाई सालों के इस छपेमांरी की सघन जांच पड़ताल कराई जाए तो खाने कमाने नाले इस योजना के तार मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय तक जुड़े हो सकते हैं ? बरहाल सरकारी तंत्र पर तमाचा बनी यह घटना निंदनीय है दोषी जनों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही के संकेत मिल रहे हैं। परन्तु एकला चलों अभियान के पीछे का पूरा सच उजागर नही होता तब तक असलियत सामने नही आ सकेगी।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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