
हां मैं पहले एठा था, सतयुग से कलयुग तक का मेरा सफर नामा है, द्वापर में भगवान राम को लंका विजय का साक्षी हूं मैं हां मैं एटा जिला हूं,एटा जिले के नुमाइंदों को बताना है, कि आपके चक्रवर्ती सम्राट राजा वैन का महल अंतरंजी खेड़ा में स्थित था,आपके चक्रवर्ती सम्राट राजा वैन बहुत बड़े वैज्ञानिक थे,राजा चक्रवर्ती वैन ने अंतरंजी खेड़ा को खेड़ाऔं में स्थापित कर रखा था, जैसे जलेसर के पास के खेड़ा नूखेडा वसुंधरा के पास खेड़ा आदि ये टीले टाइप के टापू हुआ करते थे, मैं दानव की राजधानी मेरठ थी, चारों तरफ रिक्ष संस्कृति हावी होने के बाद भी कभी एटा के परिक्षेत्र में किसी दानवों की हिम्मत नही थी, दानवों के चक्रवर्ती सम्राट राजा वैन की युद्ध नीति समझ से परे थी ,
*मैं एटा हूं उत्तर प्रदेश सरकार का सोतेला हूं*
सरकार भूल गई अयोध्या में लगी है,बात द्वापर युग की है जब चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ के पुत्र को लंका युद्ध नीति फेल हो गई थी,तब चक्रवर्ती सम्राट राजा वैन ने अपनी मिशायल छोड़ कर लंका का एक हिस्सा ध्वस्त कर समुद्र में लीन कर दिया था, चूंकि एटा जिले के प्रतिनिधि कुछ जानते है नही मानते भी है नही जिसका कारण एटा जिले को बैकवर्ड जिला में ले जा कर रख दिया है,
एटा जिले का अंतरंजी खेड़ा बफर स्टेट था,रिहासते एटा जिले में पानी भरती थी, चक्रवर्ती सम्राट राजा वैन ने कभी अपनी जनता से कर नही बसूला आप हैरान हो जाएंगे तब भी राजा टैक्स लेते थे,आज सरकार टैक्स लेती है,राजा प्रथा गई लेकिन टैक्स प्रथा ज्यों की त्यों है,
*उत्तर प्रदेश सरकार ध्यान केंद्रित करें*
संत सरकार को सीधे तोरपर चिनोती स्वीकार कर लेने चाहिए,जब आपका प्रतिनिधि नाकारा साबित हो गया है, कि एटा जिला जब बफर स्टेट था, उस एटा को बैकवर्ड जिला बना कर खड़ा कर दिया है,जब अयोध्या के राजा चक्रवर्ती सम्राट दशरथ के नंदन राम ललाट पर शोभित चंदन रघुपति की जय बोले देश वासी तब एटा जिले की जय का उद्घोष होना चाहिए हां मैं एटा हूं
*अतरंजीखेड़ा क्यों प्रसिद्ध है*?
1861-62 वर्ष में हुआ पहली बार उत्खनन एतिहासिक महत्वता
राजा बेन अतरंजी खेड़ा के शासक थे वे बौद्ध धर्म को मानने वाले थे। उन्होंने ही अतरंजीखेड़ा में बेरंजा नामक नगर बसाया था। प्रचलित है कि यहां भगवान बुद्ध ने वर्षावास किया था।