आओ हम गर्व से कहें फास्ट क्रिकेट बाह कप क्रिकेट की देन

आगरा,क्रिकेट मेरे लिए बस चुनौती थी । जिसे स्वीकार खिलाड़ी नहीं आयोजक बन कर स्वीकारी । एक बार टीम बनाई जा रही थी । अजेंद्र गुप्ता, राजीव गुप्ता ओपनर हो गए , मुकेश (भजन लाल ), नीरज, नरेश जैन, सचिन, टाटा, गेंदबाज, अश्वनी , अजय , विनय , राजेश सुरेंद्र बाथम, सर्वेंद्र सिंह चौहान जेसे सत्तर के दशक के खिलाड़ी थे । टाटा को बाहर करके टीम बनानी थी बस यही चुनौती थी । और तबसे बस आयोजक बन गया विकेट कीपर था । अस्सी के दशक में सुरेंद्र चौहान ने मेरी जगह ले ली । हाकी के जानदार खिलाड़ी नरेंद्र जिन्हे सोल्कर मानते थे भी आयोजक क्रिकेट के बने ।
नब्बे के दशक के हीरो अखिलेश जो अस्सी के अंत में हमारे साथ जुड़ा उसे उसके बड़े भाई ने नहीं जाने दिया । नहीं तो उसे स्पोर्ट्स कालेज भेजने की पूरी कोशिश की ।मगर उसे आगरा केंप भी नही ले जा सके । वह अब सुरेंद्र चौहान के साथ हमारे बीच नहीं है । मगर ये दो प्रतिभाएं देश में नाम करतीं । अफसोस ये दोनों खिलाड़ी थे मगर …..
बहुत कुछ खोकर हमने पिताजी के सिद्धान की तरह बाह में अखिल भारतीय स्तर के १९७७ से लेकर २००४तक १९ आयोजन कराए । जिससे बाह की प्रतिभाओं को अच्छा खेल खिलाड़ी देखने साथ खेलने को मिले ।मगर अफसोस मेरे लक्ष में मद्यपान घर गया जिसने क्रिकेट को विकृत कर दिया । बात कीजिए तो बात करेंगे क्या किसकी धोखेबाजी अपने साथ प्रतिभा की रही ….मेने प्रयास किए तो कई खिलाड़ी आज भी नाम लेते हैं तो कई आपकी तरह सवाल करते हैं । मैं क्रिकेट का कभी कोच नहीं बना हां प्रयोग शाला में उसका डेमोस्ट्रेटर रहा । शरद भदौरिया, अखिलेश गुप्ता, विमल शर्मा, सुरेंद्र, मनीष गुप्ता, आनंद पचोरी, विनय पचोरी, ब्रजकिशोर, अरविंद बरुआ आदि के अलावा भी कई नाम हैं सुनील पचोरी और तुम तो सुरेंद्र के मित्र थे कब कोई सूचना उसकी दी यदि समय रहते हम चेतते तो अखिलेश सुरेंद्र यूं अपयस की जिंदगी के उदाहरण न बनते । इसलिए क्रिकेट को हमने जो खोकर दिया वह नही लौटा और खोता ही गया
हां कोई माने या न माने पर भारत में फास्ट क्रिकेट की नींव बाह कप क्रिकेट से पड़ी । इसका मुझे एहसास है । १९८२में जो प्रदेशीय क्रिकेट कराई उसकी एफिलेशन upca से कराई तो हमारे २०ओवर के मैच दो घंटा पांच मिनट वाले देश के पहले फास्ट क्रिकेट के मैच थे ।जिनकी अनुमति तत्कालीन सचिव कैलाश नाथ टंडन ने बड़ी मुश्किल से दी थी । इस परंपरा को सफल बनाने में सतीश पचोरी, नरेंद्र काशीवार, सचिन गुप्ता और टाटा अश्वनी शर्मा नीरज मुकेश आदि की भूमिका के बल पर मिली। धन्यवाद लालजी तिवारी , भैरों, भले, और मुकेश तिवारी की तरह के कई मैदान के बाहर के खिलाड़ी जिनके बिना हरीशंकर तिवारी को लोग नहीं पूछते आभार बाह वाह बाह साभार शंकर देव तिवारी