
कुछ नया देने के नाम पर शहर से बहुत कुछ छीन लिया गया—
एटाशहर के लिए बहुत लिखा बात करते हैं अरूणा नगर bip कॉलोनी की जो पूरे शहर में शुरू से लेकर अबतक अपना श्रेष्ठ स्थान बानाए हुए हैं लेकिन अफसोस कि इस कालोनी के अंदर सपा सरकार से लेकर मौजूदा भाजपा सरकार तक तीन विधायक और उच्च श्रेणी का इंसान और डॉक्टरों हॉस्पिटल मौजूद है पर इसकी उखड़ी सड़कें और कैमरों जैसी असुरक्षित अव्यस्थाऔ से हर वोटर सवाल कर रहा है अपनी इस कालोनी के लिए आज 40 साल से मैं खुद देख रही हूं कि सड़कें नहीं बनी है जो टुकड़ा टूट गया उसकी मरम्मत या फिर बड़ी एपरोज की मदद से इंटरलोकिंग जैसे टेंडर प्रक्रिया में हर सत्ता अपना कार्यकाल पूर्ण कर चला जाता है न कलम बोलती है न पब्लिक अपने अधिकारों के लिए फिर तो चांदी ही चांदी है शासन, और प्रशासन, की ये मूंक जिले अपराध से बदनाम जरूर है पर नहीं,लेकिन इसकी हकीकत कुछ और ही है यहां जब बाहर से कोई अधिकारी ट्रांसफर होकर आता है तो बो बहुत डरता है और कुछ दिन के बाद बो यहां से जाने का मन नहीं करता है पता है क्यों कि अधिकारी यहां आकर बहुत अच्छे ब्यवहार कुशल इंसान वन जाते हैं,और सबसे बड़ा राज कि यहां आज तक कोई अधिकारी जनहित के कार्य के लिए नहीं आता है और कोई आ भी जाता है तो उसकी विदाई में महीना भी नहीं लगता है और हटा दिया जाता है सही मायनों में यहां नोट बोलता है काम मौन रहता है कुछ देने के नाम पर इस शहर से उल्टा ले लिया जाता है, फिर गिनती शहर की बदहाल सड़कों से शुरू–मनोरंजन चिड़िया घर तक लिया गया की संख्या में सामिल है तब बच्चों की छुट्टियां हो या परिबार कुछ पल दिन सुकून बाहर से लेने जाते हैं इस पैसे बाले क्षेत्र में आदमी के पास बहुत कुछ है पर अच्छे माहौल और उजड़े शहर में आज भी पढ़ा लिखा आदमी जानवर जैसी दिनचर्या में रहने को मजबूर है या फिर अच्छी फ़ैमलियों का तेजी से होता पलायन, लाजमी है जब आज हम इतनी प्रोग्रेस हर क्षेत्र में कर रहे हैं तो एंजॉय क्यों नहीं यहां नहीं कही और सही।@, दीप्ति की कलम से—