पशु आहार बन रहा दुधारू पशुओं के बांझ होने की वजह, रिपोर्ट योगेश मुदगल

लखनऊ, । पशु आहार के ज्यादा इस्तेमाल से गाय, भैंस जैसे दुधारु पशुओं में बांझपन बढ़ रहा है। बरेली स्थित भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों के अनुसार राज्य के 31 प्रतिशत दुधारू पशुओं में बांझपन बढ़ गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार बाजार में बिकने वाले कई पशु आहार लकड़ी का बारीक बुरादा, संगमरमर का महीन पाउडर, यूरिया आदि खराब गुणवत्ता वाले शीरे में मिलाकर बनाए जा रहे हैं। मीठा होने की वजह से पशु इस चारे को चाव से खाते हैं। हालांकि यह उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है।
पोषक तत्वों की कमी से गर्भाधान पर पड़ता है असर आईवीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. रणवीर सिंह ने बताया कि ब्रीडिंग वाली गायों को अगर सही से पोषक तत्व नहीं मिलेंगे तो दो से तीन बियांत के बाद वह गर्भाधान नहीं कर पाएगी। शोध के मुताबिक हरे चारे में पोषक तत्वों की कमी के कारण 31 प्रतिशत पशुओं में शुक्राणु और अंडाणु नहीं बने।
बांझपन को हटाने में हरा चारा ही बेहतर तरीका
आईवीआरआई में पशु पोषण विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि चारे में पोषक तत्वों का अधिक और कम प्रयोग भी पशुओं के स्वास्थ्य पर असर डालता है। भूसा और चोकर इतना महंगा हो चला है कि इन पशुओं को समुचित पशु आहार भी नहीं मिल पाता। पशुपालन निदेशक डा.इन्द्रमणि के मुताबिक पशुपालकों को चाहिए कि वे हरे चारे के साथ बरसीम, जई, ज्वार, बाजरा आदि निश्चित मात्रा में खिलाएं। इससे पशुओं में पोषक तत्वों की कमी नहीं होगी।
जिंक और कॉपर मददगार
पोषक तत्वों में जिंक और कॉपर अंडाणु और शुक्राणु को तैयार करने में मदद करते हैं। आयरन, कोबाल्ट, विटामिन ए और ई पशुओं में प्रजनन शीलता के लिए जरूरी है। तमाम निजी कंपनियों का जो पशुआहार बाजार में बिक रहा है, उसमें समुचित मात्रा में पोटीन, कैल्शियम, आयरन, कोबाल्ट, विटामिन ए और आदि पोषक तत्व नहीं मिलते हैं।