पुरानी पेंशन स्कीम की मांग में याचिका पर अंतरिम राहत से इंकार
राज्य सरकार से कोर्ट ने तीन हफ्ते में मांगा जवाब
सुनवाई 15मई को

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1अप्रैल 2005से पहले नियुक्त सहायक अध्यापकों को पुरानी पेंशन स्कीम के अंतर्गत जीपीएफ कटौती की मांग में दाखिल याचिका पर फिलहाल अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है ऐसे में अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिका पर राज्य सरकार से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है और याचिका को अगली सुनवाई के लिए 15मई को पेश करने का निर्देश दिया है। ,
यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने कमल कुमार कुशवाहा व दो अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।
याचिका पर अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी ने बहस की ।
इनका कहना है कि याचीगण की नियुक्ति 1अप्रैल 05से पहले अनुकंपा पर की गई है।उस समय पुरानी पेंशन स्कीम लागू थी । इसलिए उनके वेतन से जी पी एफ की कटौती कर पुरानी पेंशन योजना का लाभ दिया जाय।
मांग की गई है कि 28 मार्च 2005 को जारी न्यू पेंशन स्कीम के अंतर्गत याची नही आते। क्योंकि उनकी नियुक्ति नई पेंशन स्कीम लागू होने के पहले की गई है। भले ही बीटीसी ट्रेनिंग सर्टिफिकेट एनपीएस लागू होने के बाद जारी किया गया हो। याचिका में जी पी एफ कटौती रोकने के आदेश को भी चुनौती दी गई है। क्योंकि एनपीएस को भूतलक्षी प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता।
याची जिला ललितपुर में बेसिक सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। ,
मालूम हो कि रवींद्र नाथ टैगोर केस में कोर्ट ने 1अप्रैल 05से पहले नियुक्त अध्यापकों को पुरानी पेंशन स्कीम का लाभ देने का आदेश दिया था। जिसके खिलाफ विशेष अपील कोर्ट ने खारिज कर दी। सरकार ने इसके खिलाफ एस एल पी दाखिल की।जिसे बाद में सिविल अपील में तब्दील कर दिया गया जो सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
याची अधिवक्ता का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक नहीं लगाई है।ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश के तहत याचीगण पुरानी पेंशन पाने के हकदार हैं।
कोर्ट ने कहा कि मामला विचाराधीन है। इसलिए अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। सरकार अपना जवाब दाखिल करें।