
बरेली। दूध और उससे बने उत्पादों में मिलावट के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। एनालॉग डेयरी उत्पादों, हानिकारक रसायनों और विजातीय वसा के इस्तेमाल पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) अब जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई करेगा। लखनऊ में मिलावटी पनीर, खोवा और घी के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा, जबकि बरेली में भी सोमवार से डेयरियों और दुग्ध उत्पादों की जांच तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार के निर्देश के मुताबिक, किसी डेयरी या दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाई में हानिकारक रसायन अथवा विजातीय वसा पाए जाने पर सिर्फ नमूने पर कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि पूरी इकाई के उत्पाद जब्त कर नष्ट कराए जाएंगे। साथ ही उत्पादन बंद कराने, खाद्य लाइसेंस निलंबित करने और गंभीर मामलों में बीएनएस की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।
शासन के निर्देश के बाद बरेली में भी खाद्य सुरक्षा विभाग में डेयरियों और दूध से बने उत्पादों की जांच का अभियान तेज किया। सहायक आयुक्त (खाद्य) सेकेंड राहुल सिंह ने बताया कि दूध, पनीर, खोवा, घी, छेना और क्रीम की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि दूध में हानिकारक रसायन मिलने पर पूरी खेप जब्त कर नष्ट कराने के साथ खाद्य लाइसेंस निलंबित करने और एफआईआर की कार्रवाई की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित ब्रांड की बिक्री पर भी रोक लगाई जा सकती है।
बरेली मंडल में सिंथेटिक दूध, पनीर और मावा की बिक्री को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में दूध में यूरिया, डिटर्जेंट और अन्य रसायनों की मिलावट की शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। सरकार ने साफ किया है कि मिलावट की पुष्टि होने पर कार्रवाई को केवल नमूने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। मिलावट के स्रोत, निर्माण प्रक्रिया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों तक जांच पहुंचाई जाएगी। इससे दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट के संगठित नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करने की तैयारी है।