सुधीर भदौरिया ने जेल के अंदर से फोन करके महिला डॉक्टर से पांच लाख की रंगदारी मांगी, रिपोर्ट योगेश मुदगल
आगरा, । फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद कुख्यात सुधीर भदौरिया ने जेल के अंदर से फोन करके महिला डॉक्टर से पांच लाख की रंगदारी मांगी थी। पुलिस ने सजायाफ्ता सुधीर के खिलाफ कोर्ट में आरोपपत्र पेश किया है। मोबाइल किसका था। सुधीर के पास कैसे आया था। यह राज पुलिस की जांच में नहीं खुले। सुधीर के भाई सहित परिवार के पांच लोगों के खिलाफ दिसंबर 2022 में आरोप पत्र दाखिल किया गया था।

शाहगंज क्षेत्र निवासी महिला चिकित्सक ने 16 मार्च 2022 को शाहगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे में अश्लील फोटो खींचकर ब्लैकमेल करने और रंगदारी मांगने का आरोप लगाया था। पुलिस को यह भी बताया था कि उनके पास फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद सुधीर सिंह भदौरिया ने फोन किया। जान से मारने की धमकी दी। घरवालों को पांच लाख रुपये देने को कहा। यह भी बोला कि उसने ही पूरे खेल की साजिश रची थी। इंसाफ के लिए महिला डॉक्टर ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर गुहार लगाई थी। उसके बाद कार्रवाई शुरू हुई थी। पुलिस ने शाहगंज में ऋषि मार्ग निवासी सुधीर के बड़े भाई महेश चौधरी को जेल भेजा था। पुलिस ने पूर्व में महेश कुमार, वंदना, सुमन, रेनू और ममता सिंह के खिलाफ आरेापपत्र दाखिल किया था। सुधीर सिंह के खिलाफ विवेचना प्रचलित रखी थी। सुधीर का बी वारंट भेजा गया था। वह कोर्ट में पेश नहीं हुआ था। पुलिस के अनुसार चौथी बार में सुधीर भदौरिया फतेहगढ़ जेल से आगरा आया। दीवानी में पेश हुआ। पुलिस ने उसके बयान दर्ज किए। बाद में साक्ष्यों के आधार पर उसके खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया गया।
आजीवन कारावास की सजा काट रहा
फतेहगढ़ सेंट्रल जेल में बंद सुधीर भदौरिया को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। सुधीर का आपराधिक इतिहास बहुत लंबा है। वह शाहगंज थाने का हिस्ट्रीशीटर है। उसका हिस्ट्रीशीट नंबर 74 ए है। वर्ष 2004 में सिकंदरा क्षेत्र में वह सिपाही संतोष यादव की हत्या में नामजद हुआ था। राइफल लूटकर भागने का आरोप लगा था। लखनऊ में खुनखुनजी ज्वैलर्स डकैती कांड में वह जेल गया था। अगस्त 2013 में उसने खंडवा (मध्य प्रदेश) से एनएचएआई का अधिकारी बनकर प्रोपर्टी डीलर का अपहरण किया था। मध्य प्रदेश एसटीएफ ने उसे फरीदाबाद से पकड़ा था। उसके पास एके-47 मिली थी। इसी मुकदमे में उसे सजा हुई थी।
● कुख्यात के परिजनों के खिलाफ पहले लगा था आरोप पत्र
● सर्विलांस से खुलासा जेल के अदंर से किया था फोन
हाईकोर्ट से नहीं मिली राहत
आरोपित पक्ष ने मुकदमा खारिज कराने के लिए हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र लगाया था। पीड़ित महिला चिकित्सक ने बताया कि हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद आरोपित पक्ष की याचिका खारिज कर दी।