कौड़ियों के भाव बिक रहा आलू, किसान हो रहे बेहाल

कौड़ियों के भाव बिक रहा आलू, किसान हो रहे बेहाल

कासगंज, । किसान का आलू खेतों में कौड़ियों के भाव बिक रहा है। आलू की फसल करने वाले किसानों की लागत भी नहीं निकल रही है। गत वर्ष 1100 रुपये कुंतल बिकने वाले आलू की कीमत किसान को 260 से लेकर 300 रुपये कुंतल ही मिल रही है। व्यापारी भी आलू खरीदने के लिए किसान के पास नहीं पहुंच रहे हैं। किसान अब आलू की बिक्री के लिए सरकार से आस लगाए बैठे हैं।

जनपद में इस वर्ष किसानों ने 5200 हेक्टेयर भूमि में आलू की फसल की है। 10 हजार से अधिक छोटे व बड़े किसान आलू की फसल करते हैं। आलू खेतों में पड़ा है। व्यापारी आलू खरीदने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। किसान रोहित मौर्य कहते हैं कि एक एकड़ भूमि में आलू की फसल करने में 50 हजार रुपये से अधिक की लागत आती है। इस बार आलू के कीमत 260 से 300 रुपये कुंतल के हिसाब से मिल रही है। ऐसे में किसान का लागत मूल्य भी नहीं निकल पा रहा है। गत वर्ष आलू के रेट अधिक मिलने की वजह से इस बार 15 प्रतिशत अधिक किसानों ने आलू की फसल की है। आलू खेतों में खुदा पड़ा है। किसान आलू का भाव न मिलने से काफी परेशान हैं।

आलू की कीमत न मिलने की वजह से किसान काफी परेशान हैं। इस बार आलू की फसल की लागत भी नहीं निकल पा रही है। सरकार किसान का आलू खरीदे तो नुकसान कम हो सकता है।
राजू मिश्रा, किसान

गत वर्ष आलू की कीमत अच्छी मिली थी। उसके बाद किसानों ने इस बार आलू की पैदावार पर ध्यान केंद्रित किया है। मौसम अच्छा रहने से पैदावार भी अच्छी है, लेकिन किसानों को काफी घाटा है।
रोहित मौर्य, किसान

● आलू किसान की लागत भी नहीं निकल रही

● खेतों में पड़ा है आलू, नहीं पहुंच रहे व्यापारी

● 12 लाख कुंतल आलू की पैदावार हो रही जिले में

● 13 कोल्ड स्टोर हैं जनपद में

● 5200 हेक्टेयर में आलू की फसल

● 260 से 300 रुपये कुंतल बिक रहा

● 1100 रुपये कुंतल बिका था गत वर्ष

जिले में आलू की पैदावार इस बार अच्छी है। उसके बाबजूद फसल की कीमत न मिलने से किसान बेहाल हैं। आलू की अच्छी कीमत न मिलने से कोल्ड स्टोर में आलू रखने को मजबूर हैं। इस समय आलू की फसल की लागत भी नहीं निकलेगी।
दीप चंद्र, किसान

जिले में बड़ी संख्या में किसान आलू की फसल करते हैं। इस बार किसान का आलू खेतों में पड़ा है लेकिन व्यापारी आलू खरीदने गांव में नहीं आ रहे हैं। किसानों को काफी घाटा हो रहा है। सरकार मदद करे तो किसानों का घाटा कम होगा।
अशोक कुमार, किसान

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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