बात गलत है तो आइए जानें विश्व प्रसिद्ध डॉं भाष्सर शर्मा और संवाददाता राजेश शास्त्री के मध्य वार्ता के कु़ुछ अंश कारण और निवारण

राजेश कुमार शास्त्री

जो युवा होते हैं वह कभी बीमार नहीं पड़ते यह बात गलत है तो आइए जानें विश्व प्रसिद्ध डॉं भाष्सर शर्मा और संवाददाता राजेश शास्त्री के मध्य वार्ता के कु़ुछ अंश कारण और निवारण
इटवा सिद्धांर्थनगर । युवाओं में बढ़ रहे काफी तेजी से दिल के दौरे । जो युवा होते हैं वह कभी बीमार नहीं पड़ते यह बात गलत है। क्योंकि प्रतिवर्ष लगभग 28 हजार मौतें केवल हार्ट अटैक से ही हो रही हैं जिसका कारण
युवाओं में बढ़ रहे काफी तेजी से दिल के दौरे हैं ।
युवा वर्ग ज्यादातर अपनी लापरवाही के चलते ही वह बीमार होते हैं जिससे युवाओं को भी बहुत सी बीमारियां होने के चांस रहते हैं भले ही वह एक्सरसाइज करते हों किन्तु अपनी घोर लापरवाहियों के चलते ज्यादातर युवा वर्ग भी बीमार होते हैं।
इस जानलेवा बीमारी के सम्बन्थ मे जनपद सिद्धार्थनगर के वीआईपी क्षेत्र इटवा निवासी विश्व विख्यात होम्योपैथी चिकित्सक डॉक्टर भास्कर शर्मा से संवाददाता राजेश कुमार शास्त्री से हुए कुछ विशेष वार्तालाप के कुछ अंश :
वार्ता के दौरान डॉं भाष्कर शर्मा ने कहां कि यदि हम आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक दशक में केवल भारत में 2.40 लाख से ज्‍यादा लोगों की मौत हो चुकी हैlआंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2014 से 2017 के बीच 82,289 लोगों की मौत हार्ट अटैक से हुई है,यानी हर वर्ष औसतन 20 हजार मौतें हार्ट अटैक से हुईंl2018 से 2021 के बीच हार्ट अटैक से 1,10,898 लोगों की मौत हुई हैl2019, 2020 और 2021 में तो हार्ट अटैक से 28 हजार से ज्‍यादा मौतें हुई हैंl2021 के आंकड़ों पर नजर डालें तो हार्ट अटैक से सबसे ज्‍यादा मौतें 45 से 59 वर्ष की उम्र में हुई हैंl इस आयुवर्ग के 11,190 लोगों की मौतें हार्ट अटैक से हुई हैंlहार्ट अटैक से जुड़े ये आंकड़े भी चौंकाते हैं कि ज्‍यादातर पुरुष ही हार्ट अटैक के शिकार होते हैंl2021 में हार्ट अटैक से 24,510 पुरुषों की मौत हुई हैं, जबकि 3,936 महिलाओं की मौत हुई हैंl
इस समय युवाओं में दिल के दौरे पड़ने के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं lडॉक्टर भास्कर शर्मा ने यह भी कहा कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार, भारत में 40-69 साल के आयु वर्ग में होने वाली मौतों में से 45% मामले दिल की बीमारियों के होते हैंllडॉक्टर भास्कर शर्मा ने कहा कि, यूरोपीय लोगों की तुलना में भारतीयों को दिल की बीमारियाँ जीवन में कम से कम एक दशक पहले प्रभावित करती हैंl वास्तव में, दिल की बीमारियों की वजह से भारत में संभावित कामकाजी वर्षों का सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है. कामकाजी वर्षों के नुकसान से जुड़े आंकड़ें बताते हैं कि साल 2000 में यह आंकड़ा 9.2 मिलियन साल का था जिसके 2030 तक दोगुना होकर 17.9 मिलियन साल होने की उम्मीद हैl
lडॉक्टर भास्कर शर्मा ने कहा कि युवा शिकार इसलिए हो रहे है कि एक तो भारतीयों में हृदय रोग होने की आनुवांशिक प्रवृति अधिक होती है। दूसरी चीज कि हमारे देश में युवाओं की लाइफस्टाइल में हो रहे बदलाव से टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और खराब कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियां बेहद तेजी से बढ़ रही हैं. ये बीमारियाँ हार्ट अटैक के खतरे को और बढ़ाती हैंlडॉक्टर भास्कर शर्मा ने यह भी कहा कि अटैक होने से कई दिन पहले से ही आपके शरीर में सीने में भारीपन महसूस होना,सीने में दर्द होना,गले, जबड़े, पेट या कमर के ऊपरी हिस्से में दर्द होना,
सीने में खिंचाव या जलन महसूस होना,किसी एक बांह या दोनों बांहों में दर्द होना,सांस फूलना आदि शुरुआती लक्षण देखने को मिलते हैं l डॉक्टर भास्कर शर्मा ने कहा कि युवाओं को बेहतर होगा
कि साल में या दो साल में कम से कम एक बार कार्डियक स्क्रीनिंग से जुड़े टेस्ट जैसे कि ईसीजी, इकोकार्डियोग्राम, स्ट्रेस टेस्ट, कार्डियक सीटी या ट्राईग्लिसराइड और ब्लड शुगर टेस्ट, होमोसिस्टीन आदि टेस्ट ज़रूर करवाएंl
डॉक्टर भास्कर शर्मा ने कहा कि दिल का दौरा पड़ने से बचाव के लिए धूम्रपान छोड़ने,कोलेस्ट्रॉल के स्तर की जांच और नियंत्रण रखें,रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित करें,व्यायाम करें और शारीरिक रूप से फिट रहें,अतिरिक्त वजन कम करें,उचित नींद लें,तनाव का प्रबंधन करो,ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखेंl

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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