देश की अदालतों में राष्ट्र भाषा में हो काम – हरनाथ सिंह,

देश की अदालतों में राष्ट्र भाषा में हो काम – हरनाथ सिंह, रिपोर्ट योगेश मुदगल। राज्य सभा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने राज्य सभा में देश की अदालतों में लंबित मामले को लेकर प्रश्न उठाया। पांच करोड से अधिक मुकदमें लंबित है। वहीं अदालतों में अंग्रेजी भाषा में हो रही सुनवाई का भी विरोध किया है।

सोमवार को शून्य काल के दौरान हरनाथ सिंह यादव ने प्रश्न उठाया। विभिन्न मुकदमों को निपटाने के लिए समय बद्ध प्रणाली अर्थात जुडीशियल चार्टर लागू क्यों नहीं होता। इससे समय पर प्रत्येक अपराध या वाद को तय करने की समय सीमा निश्चित हो। निचली अदालतों से उच्च अदालतों साफ सुथरी तरीके से न्याय मिले। संविधान में सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों को आरक्षण का प्रावधान है। परन्तु सर्वोच्च न्यायालयों व उच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति में संविधान में प्रदत्त आरक्षण को न्यायिक तंत्र लागू करने को तैयार नहीं। आखिर क्यों? उन्होंने राज्य सभा में कहा कि देश के लोगों को सरलता, शीघ्रता और पारदर्शिता से न्याय मिले यह जिम्मेदारी हमारे न्यायिक तंत्र की है। सर्वोच्च न्यायालय देश को बताए कि संविधान की वह कौन सी धारा है जो यह कहती है कि सर्वोच्च न्यायालय संविधान से ऊपर है। सर्वोच्च न्यायालय यदि खुद के संविधान के रखवाले के रूप में देखना चाहता है तो उसे सबसे पहले न्यायीधीशों की नियुक्ति में लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों को अपनाना चाहिए।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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