*”फर्जी आदेश पर नियुक्त लिपिकों की जांच के लिए आई एसआईटी, रिपोर्ट योगेश मुदगल

एटा, राजस्व परिषद के फर्जी आदेश पर कलक्ट्रेट पर नौकरी कर रहे 14 कर्मचारियों की जांच करने के लिए एसआईटी पहुंच गई है। लखनऊ से आई यह टीम पिछले दो दिनों से यहां डेरा डाले हुए है। उस पटल पर सबसे अधिक पूछताछ की जा रही है, जहां कर्मचारियों से संबंधित डेटा रहता है।
लखनऊ से आए एसआईटी के अधिकारी कलक्ट्रेट पर हर उस पटल से गहन जानकारी ले रहे हैं, जहां से पत्रावलियों का रखरखाव किया जाता है। एसआईटी टीम के अधिकारियों ने सबसे अधिक पूछताछ संयुक्त कार्यालय में की है। जिन 14 कर्मचारियों के बारे में जांच चल रही है उसमें अधिकांश कर्मचारी कलक्ट्रेट पर ही कार्यरत हैं।
संबंधित कर्मचारियों के अलावा अन्य लोग भी एसआईटी टीम की इस जांच पर अपनी नजरें लगाए हुए हैं कि आखिर टीम ने फर्जी आदेश पर नौकरी के मामले में क्या जांच की।
मालूम हो कि वर्ष 2019 में हिन्दुस्तान अखबार ने इस खबर का खुलासा किया था। डीएम रहे सुखलाल भारती ने जांच के लिए गृह विभाग को पत्र लिखा था।
कलक्ट्रेट से गायब हो गई थी नियुक्ति संबंधी पत्रावली
कलक्ट्रेट में तैनात 14 लिपिकों ने नौकरी पा ली थी। वह करीब 26 वर्षों से नौकरी कर रहे हैं। डीएम से इस मामले की शिकायत हुई तो जांच के लिए मंगाई गई पत्रावली ही गायब मिली। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद की ओर से वर्ष 1995 में डीएम एटा को पत्र मिला। इसमें 14 लोगों को नियुक्ति देने के निर्देश थे। इस आदेश के समय रहे डीएम रहे मेजर आरके दुबे ने इन्हें नौकरी दे दी। नौकरी चार वर्ष बाद एक शिकायत हुई कि एटा में दी गई नौकरी का आदेश फर्जी है। शिकायत पर राजस्व परिषद से भेजे गए पत्र के बारे में पूछा तो जवाब आया कि ऐसा कोई आदेश राजस्व परिषद से जारी ही नहीं हुआ था। उस समय अधिकारी दंग रह गए। वर्ष 2019 में मंडलायुक्त अलीगढ़ से शिकायत की गई। इस शिकायत के लिए डीएम एटा को जांच कराने के आदेश दिए हैं। डीएम ने इन नियुक्ति संबंधी जब पत्रावली तलब की तो यह फाइल ही कलक्ट्रेट से गायब मिली। यह जानकारी मिलते ही डीएम का भी माथा ठनक गया है। आखिर कलक्ट्रेट से यह कैसे गायब हो गई। जब यह फाइल ही नहीं मिल रही है तो अब इस मामले की जांच कैसे होगी। इस मामले की जानकारी शासन को भेज दी गई थी।
शिकायत में इन कर्मचारियों के नाम
शिकायत में होतीलाल, वासुदेव, मोहनलाल, महेश कुमार यादव, रूप किशोर, भैरों प्रसाद, मोहम्मद इंतजार, नरेंद्र सिंह यादव, कैलाश नारायण, संजीव कुमार, दीपक, विनीत कुमार, परशुराम, महेंद्र पाल सिंह के नाम हैं।
लखनऊ से तीन सदस्यों की जांच करने के लिए टीम आई है। वह जांच कर रहे हैं।
- आलोक कुमार, एडीएम प्रशासन