मिर्गी के दौरे मस्तिष्क से जुड़ा रोग, बीमारी का इलाज संभव

“मिर्गी के दौरे मस्तिष्क से जुड़ा रोग, बीमारी का इलाज संभव

एटा, । आम जनमानस को मिर्गी (एपिलेप्सी) के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है। मिर्गी मस्तिष्क से जुड़ा एक रोग है, जिसे बराबर दौरा पड़ने से पहचाना जाता है। यह बीमारी सही समय पर इलाज शुरू किए जाने पर नियंत्रित, पूरी तरीके से खत्म की जा सकती है।

स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के मनोचिकित्सक डॉ. अनिल गौर ने बताया कि मिर्गी (एपिलेप्सी) किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। इस रोग से पीड़ित हर उम्र के व्यक्ति को परेशानियां अलग-अलग हो सकती हैं। मिर्गी का इलाज किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्राय मिर्गी रोग जन्मजात असामान्यताओं, मस्तिष्क में संक्रमण, सिर में चोट आदि के कारण हो सकती है। सही समय पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से इलाज शुरू किए जाने पर 90 प्रतिशत तक लोगों में यह बीमारी नियंत्रित या पूरी तरह से खत्म की जा सकती है। उन्होंने बताया कि ओपीडी में प्रतिदिन तीन से चार मरीज मिर्गी के आते हैं मानसिक रोग ओपीडी में प्रतिदिन 15 से 20 रोगी आ रहे हैं।

मिर्गी दौरे आने के कारण मिर्गी के दौरे आने के कई कारण होते हैं। जिनमें प्रमुख रूप से जन्म पूर्व एवं प्रसवकालीन चोट,जन्मजात सामान्यता, मस्तिष्क में संक्रमण, स्ट्रोक एवं ब्रेन टयूमर, सिर में दुर्घटना के कारण चोट लगना है।

बीमारी के लक्षण

● मिर्गी के दौरे आने के कई लक्षण होते है। जिनमें अचानक लड़खड़ाना (हाथ पांव में अनियंत्रित झटके आना), बेहोशी।

● हाथ-पैर में सनसनी (पिन या सुई चुभने जैसा एहसास होना) महसूस होना। हाथ-पैर या चेहरे की मांसपेशियों में जकड़न होना।

बच्चों को इस बीमारी से बचाने के लिए गर्भावस्था के दौरान सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। यदि गर्भवती को किसी तरह की बीमारी है। परेशानी से ग्रसित है। उसे उचित चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। प्रसव के दौरान भी किसी तरह की परेशानी का ख्याल रखना चाहिए।

पायल जादौन, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष, मेडिकल कालेज, एटा

मिर्गी के उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए। व्यक्ति को मिर्गी से पीड़ित होने के बारे में जैसे ही जानकारी प्राप्त हो उसे तुरंत मिर्गी का उपचार शुरू कर देना चाहिए। मिर्गी के उपचार हेतु रोगी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध चिकित्सालय की मानसिक इकाई में अपना इलाज करा सकते हैं।

डॉ. नवनीत चौहान, प्रधानाचार्य, मेडिकल कालेज, एटा।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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