
चेयरमैन चुनाव मे टिकट की मारामारी।भाजपा सपा मे कौन किस पर भारी।सहमात का खेल जारी।* एटा – एक तरफ नगर पालिका परिषद के चुनाव में अंतिम रूप देने के लिए जिला प्रशासन दिन-रात एक किए हुए हैं। वही राजनीतिक दलों ने प्रत्याशियों से आवेदन मांग लिये है। सत्ताधारी दल में हमेशा टिकटार्थियों की लाइन लंबी होती है। भाजपा में टिकटार्थियों की इसबार बड़ी लाइन है। आवेदकों मैं जैन समाज से एडवोकेट प्रशांत जैन, नीलू जैन, (धर्मपत्नी संदीप जैन)महाजनों में कंचन गुप्ता “अडंगा”, शालिनी गुप्ता, एड. पंकज गुप्ता, प्रदीप भामाशाह, एड.राहुल गुप्ता, प्रमोद गुप्ता, राकेश गुप्ता (आर.टी.ओ ऑफिस) संजय गुप्ता आडतिया, वारहसैनी समाज से वीरेन्द्र वाष्णेय, सुजीत देव वाष्णेय के अतिरिक्त ब्राह्मण समाज से दिनेश वशिष्ठ,नरेन्द्र देव उपाध्याय,मनोज पचौरी, सचिन उपाध्याय,रामू भटेले, और सुभाष शर्मा शामिल है। वहीं सपा में यादव समाज से सुनील यादव सभासद, मुस्लिम समाज से जहीर अहमद,जमशेद आलम,शामिल है। कांग्रेस में सरिता अम्बेडकर, सीमा गुप्ता, एड. मु.इरफान खान ने आवेदन किया है।बसपा से प्रशांत गुप्ता(पी.जी) का इकलौता आवेदन है।आम आदमी पार्टी में भी 3 लोगों ने आवेदन किया है।अब बात करते है सपा की। यहाँ सुनील यादव ने आवेदन के साथ सपा मुखिया से कुछ सर्ते शेयर की है।यदि टिकट मिली तो ससर्त लेंगे।दूसरे आवेदक जहीर अहमद को बसपा से सपा मे प्रोफेसर रामगोपाल यादव के आवाश पर वि.सभा.चुनाव की रणनीति के तहत शामिल किया गया था।जहीर को चेयरमैन बनाने का आश्वासन इस लिये दिया था।कि मुस्लिम बडा चेहरा शराफत अली काले का विकल्प तैयार किया था।जमशेद आलम स्वयं किसी परिचय का मुँहताज नही है।आज के राजनीज्ञौं एवं प्रशासन पर भी वह अपने ब्यवहार पर भरोसा कायम करने का हुनर रखते है। बसपा मे बैसे तो पीजी गुप्ता का नाम इकलौता है।लेकिन बसपा वि.सभा चुनाव की तर्ज पर वह जिताऊ अथवा खेल खतम कराऊ प्रत्याशी उतारने की रणनीति भी चला सकती है।इन्हीं के बीच मे समाज मे दिन रात एक कर शहर मे रात दिन गली सडकों पर अपने सामाजिक कार्यो के रिपोर्ट कार्ड के आधार पर मेधाव्रत शास्त्री भी मैदान मे होगें।अब सत्ता की हनक पर धमक किसकी भारी है।वह तो वक्त पर ही पता चलेगा।लेकिन जहाँ सपा,बसपा,काग्रेंस के प्रत्याशियों को सिंगल डोर प्रवेश मिलेगा।तो वहीं भजपा मे गेट पर भीड ज्यादा मिली तो वैक विन्डो भी भारी पड सकती है।यहां भाजपा जिला अध्यक्ष पद ब्राह्मण पर था। जो अब वैश्य समाज पर है।इस गणित मे ब्राह्मणों की मजबूत दावेदारी मानी जा रही है।ब्राह्मणों मे दिनेश बशिष्ठ तथा नरेन्द्र देव उपाध्याय की जडें सरकार एवं आर.एस.एस तक सीधी बताई जा रही है।तो मनोज पचौरी एवं सचिन उपाध्याय की भी धमक दिखाने की चर्चाऐं है। रामूभटेले और सुभाष शर्मा भी जोर अजमाइश मे लगे है।वैश्य समाज की शालिनी गुप्ता को पिछली बार जीता हुआ चुनाव हराने का आरोप सम्पूर्ण वैश्य समाज के साथ शहर के अन्य भाजपाइयों ने साँसद राजवीर सिंह (राजूभइया)पर लगाया था। चर्चा है कि साँसद द्वारा वैश्य समाज का चेयरमैन बनाने का भरोसा दिया था। वैश्य समाज का चेयरमैन यदि साँसद के सानिध्य मे बनेगा। तो साँसद के नजदीकियों पर लोग कयाश लगा रहे है।जिनमे पूर्व चेयरमैन कंचन गुप्ता “अडंगा”तथा नीलू जैन का नाम प्रमुख है।सूवे के मुखिया से नजदीकियाँ एड.पंकज गुप्ता पूर्व जिलाध्यक्ष की भी चर्चा मे है।प्रदीप भामाशाह की भी धमक लखनऊ दरवार मे वरकरार है।एड.राहुल गुप्ता भी सत्ता के कई सीर्शस्थो से सीधे बात करते है। प्रमोद गुप्ता ने भी काँग्रेस से भाजपा मे चेयरमेन बनने के प्रबल आस्वाशन पर पंजा फैंक, फूल गले मे लटकाया है।राकेश गुप्ता व संजय आडतिया भी अपनी तिकडम लगा रहे है।वारहसैनी समाज मे वीरेन्द्र वाष्णेय पुराने आर.एस.एस के मजबूत स्तम्भ बताये जाते है।तो सुजीत देव वाष्णेय(पिंंकी भइया) भी टिकट को लेकर सभी को चौंका देने की प्रक्रिया मे लगे है।बरहाल चेयरमैन चुनावी टिकट को लेकर सभी दलों मे मारामारी पडी है।कौन किस पर भारी है?इसके आँकलन मे दलौ के अनुभवी अपनी पूरी ताकत झौक रहे है।दलीय टिकटार्थियों मे भी सहमात का खेल जारी है।