सबसे महंगी डेंगू एलाइजा जांच निशुल्क करा रहा स्वास्थ्य विभाग

एटा।निजी पैथोलॉजी में हो रही मरीजों से मनमानी वसूली
बीमारी के सीजन में प्राइवेट चिकित्सक, पैथोलॉजी के गठजोड़ से मरीजों से जांच, उपचार के नाम पर मनमानी वसूली हो रही है।मरीज पहुंचने पर सबसे पहले चिकित्सक एमपी, विडाल, डेंगू और सीबीसी जांच लिखते है। इसके लिए क्लीनिक पर पहले से ही पैथोलॉजी के एजेंट मौजूद रहते है। डाक्टर के लिखते ही तत्काल मरीज का सैंपल लेकर जांच को भेज दिया जाता है। सैंपल के साथ ही मरीजों से पैसे ले लिये जाते है। रिपोर्ट आने तक मरीज को ड्रिप लगा दी जाती है। जांच रिपोर्ट में एनएस-1 पॉजिटिव एवं प्लेटलेट्स कम होने पर मरीज का उपचार शुरू होता है। मरीज के तीमारदार को दवा, बेड चार्ज एवं दवाओं पर प्रतिदिन पांच से छह हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे है। इससे मरीजों को उपचार कराने में खासी दिक्कत हो रही है।
? प्राइवेट क्लीनिक, अस्पताल में बेड चार्ज के नाम पर दो से तीन हजार रुपये मरीजों से ले रहे हैं। डेंगू मरीज पहुंचने पर चिकित्सक सबसे पहले डेंगू, मलेरिया की जांच कराते है। डेंगू एनएस-1, प्लेटलेटस कम होने पर मरीजों को भर्ती कर लिया जाता है। इसके बाद प्रतिदिन डेंगू मरीज पर पांच से छह हजार रुपये खर्च होता है।
- सुरेंद्र कुमार, कठौली (एटा)
पैथोलॉजी में डेंगू की जांच 1200 रुपये में, मलेरिया की 350 रुपये, सीबीसी 250 रुपये लिये जा रहे हैं। प्लेटलेट्स की जानकारी को डाक्टर हर दूसरे दिन सीबीसी जांच कराते है। इससे मरीजों को उपचार कराना मुश्किल हो रहा है।
-नरेश कुमार सत्तारपुर (एटा)
एटा, — अगस्त से लेकर नवंबर तक का समय प्राइवेट क्लीनिक, नर्सिगहोम, पैथोलॉजी संचालकों का ‘सीजन’ होता है। इस सीजन में भी सबसे महंगी डेंगू एलाइजा जांच स्वास्थ्य विभाग निशुल्क करा रहा है। प्राइवेट में डेंगू, मलेरिया के उपचार के नाम पर मरीजों से मनमानी वसूली हो रही है। सबसे बड़ी वसूली बैड चार्ज और जांच के नाम पर की जाती है। जिला मलेरिया अधिकारी लोकमन सिंह ने बताया कि डेंगू एलाइजा जांच सबसे महंगी है। इसकी 25 हजार की 94 किट आती है। इनसे जनपद में एनएस-1 निकलने वाले मरीजों की डेंगू कन्फर्म जांच निशुल्क कराई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने अभी तक 1616 मरीजों की एलाइजा जांच कराई। इसमें 18 डेंगू पॉजिटिव निकले। महंगी होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग मरीजों की निशुल्क एलाइजा जांच करा रहा है। मलेरिया अधिकारी ने बताया कि पूर्व में एलाइजा जांच अलीगढ़ से कराने पर प्राइवेट चिकित्सकों ने मनमाने ढंग से एनएस-1 डेंगू पॉजिटिव निकलकर मरीजों को महंगा उपचार दिया। इस बार एलाइजा जांच मेडिकल कालेज में होने से प्राइवेट चिकित्सक मनमानी नहीं कर पा रहे है। डेंगू मरीज की रिपोर्ट देने पर उनसे एलाइजा जांच के लिए सैंपल देना होगा। इसकी वजह से प्राइवेट क्लीनिक, नर्सिंग होम में इस बार कम डेंगू पॉजिटिव निकले हैं। उन्होंने प्राइवेट क्लीनिक संचालक, नर्सिगहोम को पत्र जारी किया है। उनके यहां डेंगू पॉजिटिव निकलने की सूचना स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी। अभी तक एक भी प्राइवेट चिकित्सक, नर्सिंग होम ने डेंगू पॉजिटिव निकलने की सूचना स्वास्थ्य विभाग को नहीं दी है।