हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा में 7,97,826 परीक्षार्थी अनिवार्य विषय हिन्दी में फेल हो गए हैं। हालांकि यह संख्या गत वर्ष हिन्दी में फेल होने वालों की तुलना में कम है। गत वर्ष हाईस्कूल और इंटर मिलाकर 9,98,250 परीक्षार्थी हिन्दी में फेल हुए थे। इस वर्ष भी 10वीं में सर्वाधिक 5,27,866 परीक्षार्थी हिन्दी में फेल हुए हैं जबकि 12वीं के 2,69,960 परीक्षार्थी हिन्दी में फेल हुए। 2019 में हिन्दी में फेल होने वाले विद्यार्थियों की संख्या 10 लाख थी।
हाईस्कूल में हिन्दी और प्रारंभिक हिन्दी का पेपर होता है। हिन्दी में 5,27,680 तो प्रारंभिक हिन्दी में 186 फेल हो गए। वही इंटर हिन्दी में 1,08,207 तथा सामान्य हिन्दी में 1,61,753 परीक्षार्थी फेल हुए हैं।
हाईस्कूल: संस्कृत और गणित में तगड़ा झटका
हाईस्कूल में 36 विषयों में परीक्षा हुई थी। प्रमुख विषयों की बात करें तो परीक्षार्थियों को सबसे तगड़ा झटका संस्कृत और गणित में लगा है। हालांकि अंग्रेजी और विज्ञान में भी काफी परीक्षार्थी मात खा गए। सबसे खराब रिजल्ट गणित का है, जिसमें 27 प्रतिशत परीक्षार्थी फेल हुए हैं। वहीं प्रारंभिक गणित में 96.55 प्रतिशत परीक्षार्थियों को सफलता मिली है। संस्कृत का परिणाम भी खराब रहा। इस विषय में सिर्फ 62.50 प्रतिशत परीक्षार्थी पास हुए हैं। अंग्रेजी में 19.49 तो विज्ञान में 19.60 प्रतिशत परीक्षार्थियों को असफलता हाथ लगी है। अंग्रेजी का उत्तीर्ण प्रतिशत 80.51 और विज्ञान का 80.40 प्रतिशत रहा। सामाजिक विज्ञान में 82.64, कम्प्यूटर में 89.70, वाणिज्य में 80.37, गृह विज्ञान में 89.18 तथा मानव विज्ञान में महज 48 प्रतिशत परीक्षार्थी पास हो सके।