हरदिनपावन
“25 सितम्बर/#जन्म_दिवस”

एकात्ममानववादकेप्रणेता #दीनदयालउपाध्यायआज 25 सितंबर को बछरावां नगर में वार्ड नं 2 बूथ संख्या 73 पर प्रीती पाण्डेय जिला महामंत्री भाजपा महिला मोर्चा रायबरेली के भाजपा कार्यालय पर पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित की गई और पं दीनदयाल जी की जयंती को सेवा और समर्पण के रूप में मनाया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला महामंत्री प्रीती पाण्डेय ने किया और संचालन बछरावां मंडल अध्यक्ष महिला मोर्चा प्रज्ञा शुक्ला द्वारा किया गया तथा इस मौके पर वरिष्ठ समाज सेविका सरस्वती पाण्डेय जी,संध्या भारती, सभासद संजना धानुक,मयंक राज
सुविधाओं में पलकर कोई भी सफलता पा सकता है; पर अभावों के बीच रहकर शिखरों को छूना बहुत कठिन है। 25 सितम्बर, 1916 को जयपुर से अजमेर मार्ग पर स्थित ग्राम धनकिया में अपने नाना पण्डित चुन्नीलाल शुक्ल के घर जन्मे दीनदयाल उपाध्याय ऐसी ही विभूति थे।
दीनदयाल जी के पिता श्री भगवती प्रसाद ग्राम #नगला_चन्द्रभान, जिला #मथुरा, उत्तर प्रदेश के निवासी थे। तीन वर्ष की अवस्था में ही उनके पिताजी का तथा आठ वर्ष की अवस्था में माताजी का देहान्त हो गया। अतः दीनदयाल का पालन रेलवे में कार्यरत उनके मामा ने किया। ये सदा प्रथम श्रेणी में ही उत्तीर्ण होते थे। कक्षा आठ में उन्होंने अलवर बोर्ड, मैट्रिक में अजमेर बोर्ड तथा इण्टर में पिलानी में सर्वाधिक अंक पाये थे।
14 वर्ष की आयु में इनके छोटे भाई शिवदयाल का देहान्त हो गया।1939 में उन्होंने सनातन धर्म कॉलेज, #कानपुर से प्रथम श्रेणी में बी.ए. पास किया। यहीं उनका सम्पर्क संघ के उत्तर प्रदेश के प्रचारक #श्रीभाऊरावदेवरस से हुआ। इसके बाद वे संघ की ओर खिंचते चले गये। एम.ए. करने के लिए वे आगरा आये; पर घरेलू परिस्थितियों के कारण एम.ए. पूरा नहीं कर पाये। प्रयाग से इन्होंने एल.टी की परीक्षा भी उत्तीर्ण की। #संघकेतृतीयवर्षकीबौद्धिकपरीक्षा में उन्हें #पूरेदेशमेंप्रथमस्थान मिला था।
अपनी मामी के आग्रह पर उन्होंने प्रशासनिक सेवा की परीक्षा दी। उसमें भी वे प्रथम रहे; पर तब तक वे नौकरी और गृहस्थी के बन्धन से मुक्त रहकर #संघकोसर्वस्वसमर्पण करने का मन बना चुके थे। इससे इनका पालन-पोषण करने वाले मामा जी को बहुत कष्ट हुआ। इस पर दीनदयाल जी ने उन्हें एक पत्र लिखकर क्षमा माँगी। वह पत्र ऐतिहासिक महत्त्व का है। 1942 से उनका #प्रचारकजीवन #गोलागोकर्णनाथ (#लखीमपुर, उ.प्र.) से प्रारम्भ हुआ। 1947 में वे #उत्तरप्रदेशकेसहप्रान्त_प्रचारक बनाये गये।
1951 में #डाश्यामाप्रसादमुखर्जी ने नेहरू जी की #मुस्लिमतुष्टीकरण की नीतियों के विरोध में केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल छोड़ दिया। वे #राष्ट्रीयविचारों वाले एक नये राजनीतिक दल का गठन करना चाहते थे। उन्होंने संघ के तत्कालीन #सरसंघचालक #श्री_गुरुजी से सम्पर्क किया। गुरुजी ने दीनदयाल जी को उनका सहयोग करने को कहा।
प्रीतीपांडेयजिलामहामंतरीम.मो.रायबरेली