#Etah….
आखिर क्यों छुपाई जा रही है कोरोना ग्रसितो की डिटेल्स
◾ऐसे तो जिले में कोरोना संक्रमितो की हो जाएगी भरमार
◾ Positive रोगियों के नाम छुपाना जन स्वास्थ्य से है खिलवाड़
◾जनहित में कोरोना ग्रसितो के नाम छुपाना कहीं भारी न पड़ जाए स्वास्थ्य विभाग को
◾कोरोना केस हिस्ट्री न मिलने से आम लोगों में बढ़ रहा भय
कोरोना ग्रसित लोगों से संबंधित जांच रिपोर्ट के खुलासा में सीएमओ एटा डॉ. अजय अग्रवाल द्वारा पॉजिटिव लोगों के नाम छुपाने का रहस्य जनता के मध्य गहराता जा रहा है। लोगों का कहना है कि क्या नाम छुपाने का निर्देश प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री अथवा जिलाधिकारी या किसी अन्य बडे स्तर से दिया गया है। आखिरकार इस खतरनाक बीमारी से ग्रसित लोगों का नाम पता नहीं होगा तो उससे जुड़े हुए उसके परिवारीजनों व संपर्क में आए अन्य लोगों से आम जनमानस कैसे बच पाएगा। अब तक जो रिपोर्ट आ रही है। उनमें मातृ (45 वर्षीय व्यक्ति निवासी बागवाला) का उल्लेख करके जनता को अंधेरे में मरने के लिए छोड़ने जैसा कार्य किया जा रहा है। साथ ही कोरोना के आंकड़े भी अब छुपाए जा रहे हैं। जो भी रिपोर्ट जारी होती है वो स्वास्थ्य विभाग के आईडीएसपी विभाग द्वारा जारी की जाती हैं। जब कोविड-19 के लिए अधिकृत नोडल अधिकारी से जानकारी की जाती है तो सीएमओ के आदेश बोल कर इतश्री कर लेते हैं और जब सीएमओ एटा से बात की जाती है तो वे जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के आदेश का बोलकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। ऐसे गंभीर मामले को लेकर जब दैनिक जिला टाइम्स ने एडीएम प्रशासन विवेक मिश्रा से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने साफ-साफ बताया कि प्रशासन द्वारा ऐसा कोई भी आदेश स्वास्थ्य विभाग को नही दिया गया है जिसमें प्रेस के माध्यम से कोरोना ग्रसित की जानकारी छुपाई जाए।
लोगों का मुख्य चिकित्साधिकारी एटा के लिए सवाल है कि वह नाम छुपाने के प्रकरण पर जनहित मे या तो सत्यता का खुलासा करें, या फिर जनता को अपनी मजबूरी से अवगत कराएं।
यह एक गंभीर मामला हैं अगर आगे भी ऐसे ही कोरोना ग्रसित की जानकारी छुपाई जाती रही तो दिनों दिन कोरोना संक्रमितों की संख्या का आंकड़ा रोकने से कोई नहीं रोक सकता और यह कहीं उल्टा स्वास्थ्य विभाग पर भारी न पड़ जाए।
